Educational Update: NEET परीक्षा की नई तिथि 21 जून! योग दिवस पर शिक्षा व्यवस्था के आत्ममंथन का अवसर
NEET परीक्षा की नई तिथि ने छात्रों की चिंता बढ़ाई, स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और नैतिक सुधार की उठाई मांग
Educational Update: राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (NEET) की नई तिथि 21 जून घोषित होना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़े गहरे प्रश्नों का प्रतीक बन गया है। जिस परीक्षा से लाखों विद्यार्थियों के भविष्य का निर्धारण होता है, उसी परीक्षा को लेकर बार-बार उठ रहे विवाद, अव्यवस्था, पेपर लीक और तिथि परिवर्तन ने विद्यार्थियों तथा अभिभावकों के मन में असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण उत्पन्न किया है।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती का वीडियो संदेश केवल परीक्षा पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्र की शिक्षा और नैतिक व्यवस्था पर गंभीर चिंतन का आह्वान प्रतीत होता है।
21 जून का दिन विश्व योग दिवस के रूप में पूरी दुनिया में मनाया जाता है। योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा के संतुलन का विज्ञान है। विडंबना यह है कि जिस दिन विश्व भारत की योग परंपरा को सम्मान देगा, उसी दिन भारत के लाखों विद्यार्थी तनाव, अनिश्चितता और प्रशासनिक असफलताओं के बीच परीक्षा देने को विवश होंगे।
स्वामी जी ने अपने संदेश में जिस “तिथि और प्रशासनिक विफलता” की बात कही, वह आज देश के हर छात्र और अभिभावक की पीड़ा बन चुकी है। परीक्षा केवल प्रश्नपत्र हल करने की प्रक्रिया नहीं होती, यह वर्षों की मेहनत, सपनों, त्याग और मानसिक संतुलन की परीक्षा भी होती है। जब बार-बार परीक्षा तिथि बदले, सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न उठें और पारदर्शिता संदेह के घेरे में आए, तब सबसे अधिक आघात विद्यार्थियों के मनोबल पर पड़ता है।
भारत सदैव गुरु-शिष्य परंपरा और ज्ञान की पवित्रता का केंद्र रहा है। यहाँ शिक्षा को “विद्या ददाति विनयम्” कहा गया। लेकिन जब शिक्षा व्यवस्था प्रतियोगिता की अंधी दौड़, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के बोझ तले दबने लगे, तब समाज के संतों और चिंतकों का बोलना आवश्यक हो जाता है।
योग दिवस का वास्तविक संदेश आत्मसंयम, अनुशासन और संतुलन है। यदि शासन और प्रशासन इन मूल्यों को अपनाए, तो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास दोनों स्थापित हो सकते हैं। आज आवश्यकता केवल नई परीक्षा तिथि घोषित करने की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने की है जहाँ देश का कोई भी विद्यार्थी स्वयं को ठगा हुआ महसूस न करे।
NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा केवल मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का माध्यम नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के डॉक्टरों के चयन की प्रक्रिया है। यदि इस प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगते हैं, तो उसका प्रभाव आने वाले समय में पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर भी पड़ सकता है। इसलिए यह विषय केवल छात्रों तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय है।
स्वामी जी का संदेश इस दृष्टि से अतिमहत्वपूर्ण है कि उन्होंने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक या प्रशासनिक विवाद के रूप में नहीं, बल्कि नैतिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत किया। यह समय दोषारोपण का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास पुनर्स्थापित करने का है।
21 जून का योग दिवस यदि आत्ममंथन का अवसर बन जाए, तो संभव है कि भारत की परीक्षा प्रणाली भी अधिक पारदर्शी, अनुशासित और छात्रहितैषी दिशा में आगे बढ़े। देश के लाखों विद्यार्थी केवल परीक्षा नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण अवसर चाहते हैं, और यही किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।
(लेखक- विश्लेषक एवं स्वतंत्र पत्रकार हैं)



