ऊर्जा संकट से निपटने की तैयारी, केंद्र ने Coal Gasification Project को दी मंजूरी

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। तेल और गैस की संभावित आपूर्ति बाधित होने की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार अब घरेलू ऊर्जा स्रोतों पर अधिक जोर दे रही है। इसी दिशा में केंद्रीय कैबिनेट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए कोयले से गैस बनाने की बड़ी परियोजना को मंजूरी दी है।

सरकार ने Coal Gasification Project के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को हरी झंडी दी है। इस परियोजना का उद्देश्य घरेलू कोयले का उपयोग करके गैस, यूरिया और विभिन्न प्रकार के केमिकल्स का उत्पादन बढ़ाना है। इससे देश की आयातित ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

कोयला गैसीकरण तकनीक के तहत कोयले को सिंथेटिक गैस यानी ‘सिन्गैस’ में बदला जाता है। इस गैस का उपयोग ईंधन के अलावा उर्वरक और रासायनिक उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक पारंपरिक तरीके से कोयले के उपयोग की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन करने में भी सहायक हो सकती है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत के पास लगभग 400 वर्षों तक उपयोग के लिए पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है। सरकार इसी संसाधन का बेहतर इस्तेमाल कर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और जियो-पॉलिटिकल तनाव को देखते हुए यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र के अलावा सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर भी कई बड़े फैसले लिए हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के तहत सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। अब सोने और चांदी के आयात पर 10 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क और 5 प्रतिशत कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) लगाया जाएगा। इसके बाद इन पर प्रभावी टैक्स 6 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है।

किसानों के हित में भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मंत्रिमंडल ने 2026-27 के खरीफ सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद सुनिश्चित करने हेतु 2.6 लाख करोड़ रुपये की राशि को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी फसलों का बेहतर मूल्य दिलाना है।

औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए सरकार ने सरखेज-धोलेरा सेमी-हाई-स्पीड डबल-लेन कॉरिडोर परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट पर 20,665 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे कनेक्टिविटी और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सरकार के ये सभी कदम ऐसे समय में सामने आए हैं जब वैश्विक बाजार में ऊर्जा और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में घरेलू संसाधनों पर आधारित योजनाएं भारत को आर्थिक और ऊर्जा दोनों मोर्चों पर मजबूती देने की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।

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