National News: 12 साल में बदली पासपोर्ट सेवा की तस्वीर, 545 केंद्रों तक पहुंची सुविधा; विदेश यात्रा हुई पहले से आसान
डॉ. एस. जयशंकर ने RPO कॉन्फ्रेंस 2026 में गिनाईं उपलब्धियां, डिजिटल सेवाओं और डाकघर पासपोर्ट केंद्रों के विस्तार से करोड़ों नागरिकों को मिला लाभ।
New Delhi: कभी पासपोर्ट बनवाना लंबी प्रक्रिया, कागजी औपचारिकताओं और बड़े शहरों के चक्कर लगाने से जुड़ा माना जाता था। लेकिन पिछले 12 वर्षों में भारत की पासपोर्ट सेवा व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया है। अब यह सेवा अधिक तेज, पारदर्शी, डिजिटल और देश के दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है।
नई दिल्ली में आयोजित क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारियों के वार्षिक सम्मेलन (RPO Conference 2026) में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बताया कि वर्ष 2014 में देशभर में केवल 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) थे, जबकि अब उनकी संख्या बढ़कर 545 से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा 454 डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) भी स्थापित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को भी आसानी से पासपोर्ट सेवाएं मिल रही हैं।
पासपोर्ट सेवा बनी तेज, सुरक्षित और सुलभ
विदेश मंत्री ने कहा कि अब पासपोर्ट जारी करने की पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और विकेंद्रीकृत हो गई है। इसका लाभ देश के सुदूर इलाकों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक साख लगातार मजबूत हुई है और सरकार की प्राथमिकता है कि पासपोर्ट प्राप्त करना हर नागरिक का अधिकार बने, न कि कठिन प्रक्रिया।
पासपोर्ट जारी करने में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी

सम्मेलन में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में लगभग 83 लाख पासपोर्ट जारी किए गए थे, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 1.38 करोड़ से अधिक पहुंच गई। यह वृद्धि देशवासियों की बढ़ती वैश्विक भागीदारी, रोजगार, शिक्षा और पर्यटन के अवसरों को भी दर्शाती है।
डिजिटल तकनीक से आसान हुई प्रक्रिया
सरकार ने पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम संस्करण 2.0 (Passport Seva Programme 2.0) लागू कर डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत किया है। इसके तहत:
- पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पहले से तेज हुई।
- एम पासपोर्ट सेवा (mPassport Seva) ऐप के जरिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध हुई।
- बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई।
- आवेदन से लेकर पासपोर्ट प्राप्त करने तक की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनी।
वैश्विक भारत की जरूरतों के अनुरूप व्यवस्था
विशेषज्ञों का मानना है कि पासपोर्ट सेवा का यह विस्तार केवल प्रशासनिक सुधार नहीं बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति का भी संकेत है। शिक्षा, रोजगार, व्यापार और पर्यटन के लिए विदेश जाने वाले भारतीयों की संख्या बढ़ने के साथ मजबूत पासपोर्ट व्यवस्था विकसित भारत के लक्ष्य को भी गति दे रही है।



