Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर पर नया सियासी विवाद, कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का इस्तीफा मांगा
नेशनल वॉर मेमोरियल पर ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीदों के नाम दर्ज होने के बाद सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर संसद को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफे की मांग की, जबकि रक्षा मंत्रालय ने सभी आरोपों को भ्रामक बताया है।
Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बार फिर देश की राजनीति गरमा गई है। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) पर ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए छह जवानों के नाम दर्ज होने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी भारतीय सैनिक की मौत नहीं हुई, जबकि बाद में छह जवानों के सर्वोच्च बलिदान की पुष्टि हुई। इसी आधार पर कांग्रेस ने रक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग कर दी है।
संसद में दिए गए बयान पर कांग्रेस का सवाल
बीके हरिप्रसाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि वर्ष 2025 में संसद के भीतर रक्षा मंत्री ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी भारतीय सैनिक की जान नहीं गई। लेकिन बाद में उन्हीं जवानों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दर्ज किए गए, जिससे सरकार के बयान पर सवाल खड़े हो गए।
हरिप्रसाद ने कहा कि यदि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर संसद को गलत जानकारी दी गई है तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के शहीद जवान सत्य, सम्मान और पारदर्शिता के हकदार हैं, इसलिए रक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
नेशनल वॉर मेमोरियल पर दर्ज हुए छह शहीदों के नाम
मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के छह जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। हाल ही में इन सभी शहीदों के नाम नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित किए गए। इसी के बाद विपक्ष ने सरकार के पुराने बयानों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
रक्षा मंत्रालय ने आरोपों को बताया भ्रामक
विवाद बढ़ने के बाद रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। मंत्रालय ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए सभी छह जवानों को पहली उपलब्ध अवसर पर ही पूरे सैन्य सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई थी।
मंत्रालय के अनुसार, कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में यह गलत धारणा बनाई गई कि इन जवानों के बलिदान को पहली बार अब स्वीकार किया गया है, जबकि ऐसा नहीं है।
11 मई को ही दी गई थी श्रद्धांजलि
रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 11 मई 2025 को आयोजित आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स (DGMO) ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए सभी छह जवानों को सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
मंत्रालय का कहना है कि उस समय ही उनके सर्वोच्च बलिदान का उल्लेख किया गया था और सरकार ने कहीं भी उनके सम्मान में कोई कमी नहीं छोड़ी।
वीरता पुरस्कारों से भी किया गया सम्मानित
रक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि इन सभी शहीद सैनिकों को वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इसकी आधिकारिक जानकारी 14 अगस्त 2025 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई थी। मंत्रालय के अनुसार, यह सम्मान भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप उनके साहस और बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक मान्यता देने का प्रतीक है।
Operation Sindoor: प्रदर्शनी में ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ और ‘किसानों व वंचितों के सम्मान’ की झलक
सियासत तेज होने के आसार
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। एक तरफ कांग्रेस संसद को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए जवाबदेही की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर रक्षा मंत्रालय सभी आरोपों को तथ्यहीन और भ्रामक बताते हुए कह रहा है कि शहीदों का सम्मान पहले दिन से ही पूरी गरिमा के साथ किया गया था।
ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक और अधिक गरमा सकता है।
Written By: Ekta Verma



