US Tariffs on India : US सीनेट में भारत पर 100% टैरिफ का विरोध, सांसद बोले- ‘यह अमेरिका के अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा’

US Tariffs on India : अमेरिकी सीनेट में रूस प्रतिबंध विधेयक के तहत भारत पर 100% टैरिफ लगाने के प्रस्ताव का विरोध हुआ। सीनेटर रॉन वाइडन और रैंड पॉल ने कहा कि इससे अमेरिका के हितों और भारत-अमेरिका संबंधों को नुकसान होगा।

US Tariffs on India : अमेरिका में रूस प्रतिबंध (Russia Sanctions) विधेयक के तहत भारत और चीन पर 100% टैरिफ लगाने के प्रस्ताव का अमेरिकी सीनेट में विरोध शुरू हो गया है। दो वरिष्ठ अमेरिकी सांसदों ने इस प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसा कदम अमेरिका के आर्थिक और रणनीतिक हितों के खिलाफ होगा तथा भारत जैसे महत्वपूर्ण साझेदार के साथ संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है।

सीनेट में बहस के दौरान डेमोक्रेटिक सीनेटर Ron Wyden और रिपब्लिकन सीनेटर Rand Paul ने प्रस्तावित 100% टैरिफ का विरोध किया।

रैंड पॉल बोले- ‘अमेरिका खुद अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहा’

बहस के दौरान रैंड पॉल ने कहा कि भारत पर इतने भारी टैरिफ लगाना “अमेरिका का खुद अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा” होगा। उनका तर्क था कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों में अनावश्यक तनाव पैदा होगा और अमेरिकी हितों को भी नुकसान पहुंचेगा।

वहीं, रॉन वाइडन ने भी विधेयक में शामिल टैरिफ संबंधी प्रावधानों पर अपनी असहमति जताई।

क्या है रूस प्रतिबंध विधेयक?

अमेरिकी सीनेट ने पिछले महीने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से इस विधेयक को प्रक्रियागत मतदान (Procedural Vote) में आगे बढ़ाया था। यदि यह अपने मौजूदा स्वरूप में कानून बनता है, तो रूस से ऊर्जा और अन्य वस्तुओं का आयात जारी रखने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।

इस प्रस्ताव से भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान जैसे देशों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

भारत क्यों हो सकता है प्रभावित?

यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है। हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के जरिए तेल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भारत की रूसी ऊर्जा पर निर्भरता और बढ़ी है।

ऐसे में यदि अमेरिकी विधेयक मौजूदा स्वरूप में पारित होता है, तो भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।

86-12 मतों से आगे बढ़ा विधेयक

जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सीनेट ने प्रक्रियागत मतदान में इस विधेयक को 86-12 मतों से आगे बढ़ाया। इस विधेयक का उद्देश्य रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों को और सख्त करना तथा रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बनाना है।

यह विधेयक वर्ष 2025 में पेश किया गया था और इसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का समर्थन भी मिल चुका है। इसके मूल प्रायोजक दिवंगत अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham थे।

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