International News: होर्मुज में ‘स्टील की दीवार’ वाले ट्रंप के बयान पर ईरान का पलटवार, कहा- फेक न्यूज से खतरनाक है फेक इंटेलिजेंस
होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण के ट्रंप के दावे के बाद ईरान ने पलटवार किया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी खुफिया दावों पर सवाल उठाते हुए कड़ी चेतावनी दी।
International News: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने होर्मुज पर ‘स्टील की दीवार’ खड़ी कर दी है और इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर उसका पूरा नियंत्रण है। ट्रंप के इस बयान पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने तीखा पलटवार किया है।
ट्रंप ने होर्मुज को लेकर क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दावा किया कि अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ‘स्टील की दीवार’ बना दी है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है और अमेरिका होर्मुज पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा।
ट्रंप ने अपने बयान में ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी हैं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की स्थिति भी बेहद खराब है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की अर्थव्यवस्था और महंगाई को लेकर भी गंभीर दावे किए और कहा कि ईरान के पास अब केवल ‘फेक न्यूज’ और बढ़ती महंगाई बची है।
अराघची ने ट्रंप को दिया करारा जवाब
ट्रंप के दावों पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जवाब दिया। उन्होंने होर्मुज को लेकर अमेरिकी आकलन को गलत बताया और इसे अमेरिकी खुफिया तंत्र की विफलता से जोड़ दिया।
अराघची ने चेतावनी देते हुए कहा कि होर्मुज को लेकर अमेरिका का आकलन एक और बड़ी गलती साबित हो सकता है। उन्होंने अमेरिकी खुफिया सूचनाओं पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘फेक इंटेलिजेंस’ फेक न्यूज से भी ज्यादा खतरनाक है।
ईरानी विदेश मंत्री ने अपने संदेश में यह भी संकेत दिया कि तेहरान अपने रुख से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।
ईरान का दावा- होर्मुज अभी भी हमारे नियंत्रण में
ईरान की ओर से होर्मुज को लेकर अमेरिकी दावों को खारिज किया गया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि अमेरिकी अधिकारियों के बयान से जमीनी हकीकत नहीं बदलती और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी ईरान के नियंत्रण और प्रबंधन में है।
ईरान की ओर से यह भी कहा गया है कि सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल करने का फैसला उसकी शर्तों पर निर्भर करेगा। यही मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए इसकी रणनीतिक अहमियत बहुत ज्यादा है।
इस मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। ऐसे में अगर होर्मुज में लंबे समय तक समुद्री आवाजाही बाधित रहती है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
तेल की कीमतों में तेजी से लेकर एशियाई और यूरोपीय बाजारों में ऊर्जा लागत बढ़ने तक, होर्मुज में तनाव का असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
होर्मुज खोलने को लेकर ईरान की क्या शर्तें हैं?
ईरान की ओर से होर्मुज में सामान्य आवाजाही बहाल करने के लिए कई शर्तों की बात सामने आई है। इनमें युद्ध को खत्म करना, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना और क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी जैसी मांगें शामिल बताई जा रही हैं।
इसके अलावा तेहरान अमेरिका से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने और विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करने की मांग भी कर रहा है।
ऐसे में होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव केवल सैन्य मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा संबंध वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से भी जुड़ गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच तनाव आगे किस दिशा में बढ़ता है और क्या होर्मुज को लेकर कोई कूटनीतिक समाधान निकल पाता है।



