PFI Action in UP: PFI पर यूपी में शिकंजा और कसेगा! ब्रजेश पाठक बोले- पूरा नेटवर्क होगा ध्वस्त, 57 संदिग्ध हिरासत में

उत्तर प्रदेश में प्रतिबंधित संगठन PFI से जुड़े संदिग्ध ठिकानों पर कई जिलों में कार्रवाई के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने पुलिस-प्रशासन को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

PFI Action in UP: उत्तर प्रदेश में प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI के खिलाफ जांच और कार्रवाई तेज होने के बीच उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पुलिस और प्रशासन को और अधिक सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि प्रदेश में PFI के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है। संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी के साथ-साथ बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की गहन जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।

ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश में किसी भी तरह की आतंकी या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को पनपने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और जिला प्रशासन को सतर्क रहने तथा संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने को कहा है। सरकार का जोर ऐसे लोगों और नेटवर्क की पहचान करने पर है, जिनके खिलाफ जांच एजेंसियों को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के संबंध में साक्ष्य मिले हैं।

PFI के खिलाफ यह कार्रवाई उस संगठन पर केंद्र सरकार की ओर से लगाए गए प्रतिबंध के बाद शुरू हुई व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है। सितंबर 2022 में केंद्र सरकार ने PFI और उससे जुड़े कई संगठनों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत पांच साल के लिए प्रतिबंधित किया था। इसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय और अन्य जांच एजेंसियों ने संगठन से जुड़े लोगों और कथित नेटवर्क के खिलाफ अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की थी।

उत्तर प्रदेश में भी PFI और उससे जुड़े संगठनों के खिलाफ जांच एजेंसियों की गतिविधियां तेज रही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एटीएस और एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से लखनऊ, लखनऊ ग्रामीण, कानपुर, बाराबंकी, बहराइच, मेरठ, अलीगढ़ और बुलंदशहर समेत कई जिलों में संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई का दायरा 26 जिलों तक बताया गया है।

इन छापेमारी के दौरान 57 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई थी। अधिकारियों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ के अलावा छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों और डिजिटल या अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार और जांच एजेंसियों का फोकस कथित फंडिंग नेटवर्क पर भी है। अधिकारियों की ओर से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि संगठन या उससे जुड़े लोगों तक धन का प्रवाह किस माध्यम से हुआ और क्या किसी तरह की विदेशी फंडिंग या संदिग्ध आर्थिक गतिविधियां इसमें शामिल थीं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां बैंकिंग लेनदेन, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल करती हैं।

PFI के खिलाफ कार्रवाई का राजनीतिक मुद्दा भी काफी पुराना है। उत्तर प्रदेश सरकार के कई नेताओं ने केंद्र के प्रतिबंध का समर्थन किया था। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाला फैसला बताया था। ब्रजेश पाठक ने भी कहा था कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई में सामने आए तथ्यों के आधार पर गृह मंत्रालय ने प्रतिबंध का निर्णय लिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी PFI और उसके सहयोगी संगठनों पर प्रतिबंध को स्वागत योग्य कदम बताया था। उन्होंने कहा था कि देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले संगठनों और व्यक्तियों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। सरकार की ओर से यह संदेश लगातार दिया जाता रहा है कि कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

PFI के खिलाफ कार्रवाई का एक संदर्भ हाथरस मामले के बाद भी सामने आया था। उस समय जांच एजेंसियों ने PFI की छात्र इकाई कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी। बाद में विभिन्न जांचों में संगठन और उससे जुड़े लोगों की कथित गतिविधियों को लेकर एजेंसियों ने अपनी जांच आगे बढ़ाई।

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लखनऊ के मदेयगंज क्षेत्र से सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से जुड़े एक नेता की गिरफ्तारी का भी जिक्र सामने आया था। हालांकि किसी व्यक्ति की भूमिका या अपराध में संलिप्तता का अंतिम निर्धारण अदालत और जांच की प्रक्रिया के आधार पर ही होता है। फिलहाल एजेंसियों का ध्यान पूछताछ और साक्ष्यों के विश्लेषण पर है।

PFI पर प्रतिबंध और उसके बाद हुई कार्रवाई को लेकर सरकार का तर्क राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा है, जबकि ऐसे मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। किसी संगठन या व्यक्ति के खिलाफ आरोपों की पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होती है।

ब्रजेश पाठक के ताजा निर्देशों से साफ है कि उत्तर प्रदेश सरकार PFI से जुड़े कथित नेटवर्क और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर निगरानी कम करने के मूड में नहीं है। पुलिस और प्रशासन को जिलास्तर पर सतर्कता बढ़ाने के साथ संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर तेजी से कार्रवाई करने को कहा गया है।

अब जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि 26 जिलों में हुई कार्रवाई से कौन-कौन से नए तथ्य सामने आते हैं। बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। सरकार की ओर से भी स्पष्ट संकेत है कि राष्ट्रविरोधी या आतंकी गतिविधियों से जुड़े किसी भी नेटवर्क के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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