Rahul Gandhi Kharge Red Fort: लाल किले से राहुल गांधी-खरगे की गैर-मौजूदगी पर घमासान, BJP बोली- देश के कार्यक्रम में होना चाहिए था
लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की गैर-मौजूदगी पर बीजेपी ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने प्रोटोकॉल को वजह बताया है।
Rahul Gandhi Kharge Red Fort: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली के लाल किले पर आयोजित मुख्य समारोह में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की गैर-मौजूदगी ने सियासी बहस को जन्म दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया, लेकिन कांग्रेस के दोनों प्रमुख विपक्षी नेता समारोह में नजर नहीं आए। बीजेपी ने इसे लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया है कि जब दोनों नेताओं को संवैधानिक पद के साथ कैबिनेट मंत्री के बराबर दर्जा और सुविधाएं मिलती हैं, तो राष्ट्रीय समारोह में उनकी मौजूदगी क्यों नहीं रही।
बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की अनुपस्थिति को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में और मल्लिकार्जुन खरगे राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। दोनों को कैबिनेट रैंक हासिल है और इसी के अनुरूप उन्हें वेतन, स्टाफ और सरकारी सुविधाएं मिलती हैं। शाहनवाज हुसैन ने सवाल उठाया कि जब ये सुविधाएं देश और संविधान से जुड़े पद की जिम्मेदारियों के तहत मिलती हैं, तो राष्ट्रीय पर्व के मुख्य समारोह में भी विपक्ष के नेताओं की मौजूदगी होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और खरगे का समारोह से दूर रहना महज संयोग नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध फैसला है। बीजेपी नेता ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस देश का सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व है और ऐसे अवसर पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी प्रमुख संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को कार्यक्रम में उपस्थित रहना चाहिए।
शाहनवाज हुसैन ने यह भी कहा कि इस बार स्वतंत्रता दिवस का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का संदर्भ भी इससे जुड़ा हुआ है। ऐसे समय में विपक्ष के दोनों नेता लाल किले के मुख्य समारोह से अनुपस्थित रहे, इसे बीजेपी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
हालांकि कांग्रेस की ओर से इस पूरे मामले पर अलग तस्वीर पेश की गई है। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने किसी राजनीतिक विरोध के कारण समारोह का बहिष्कार नहीं किया। पार्टी के मुताबिक, कार्यक्रम में बैठने की व्यवस्था और प्रोटोकॉल को लेकर आपत्ति थी। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि विपक्ष के नेताओं के संवैधानिक पद और कैबिनेट रैंक के अनुरूप प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते उन्होंने समारोह में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया।
यह विवाद नया नहीं है। 2024 में भी स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राहुल गांधी की सीट को लेकर सवाल उठे थे। उस समय नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को आगे की पंक्तियों के बजाय पीछे की ओर जगह दी गई थी। कांग्रेस ने इसे नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा और प्रोटोकॉल से जोड़कर सवाल उठाए थे। इसके बाद भी कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों में विपक्षी नेताओं की मौजूदगी और बैठने की व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद देखने को मिला।
उस समय रक्षा मंत्रालय की ओर से सफाई दी गई थी कि बैठने की व्यवस्था में बदलाव का एक कारण ओलंपिक खिलाड़ियों को विशेष सम्मान देना था। खिलाड़ियों को आगे की पंक्तियों में बैठाने के लिए प्रोटोकॉल के सामान्य क्रम में बदलाव किया गया था। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया था कि सीटों की व्यवस्था किसी राजनीतिक पक्षपात के आधार पर नहीं की गई थी।
इस बार भी कांग्रेस ने प्रोटोकॉल को ही मुख्य कारण बताया है। पार्टी का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष दोनों सदनों में महत्वपूर्ण संवैधानिक भूमिका निभाते हैं और उनके पद के अनुरूप सम्मान और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। कांग्रेस के मुताबिक, अगर प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जाता है तो यह केवल किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि संवैधानिक पद का सवाल बन जाता है।
वहीं बीजेपी इसे कांग्रेस की राजनीतिक सोच से जोड़कर देख रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर राजनीतिक असहमति को अलग रखकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पार्टी का तर्क है कि लाल किले का समारोह किसी सरकार या पार्टी का कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश का राष्ट्रीय आयोजन है। इसलिए विपक्ष के शीर्ष नेताओं की उपस्थिति लोकतांत्रिक परंपरा और राष्ट्रीय एकता का संदेश देती है।
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राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की गैर-मौजूदगी ने एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच प्रोटोकॉल, संवैधानिक पदों की गरिमा और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भागीदारी को लेकर बहस तेज कर दी है। बीजेपी जहां इसे विपक्ष की जिम्मेदारी से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे संवैधानिक सम्मान और प्रोटोकॉल का मुद्दा बता रही है।
अब यह विवाद आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर भी दिखाई दे सकता है। खासकर स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर विपक्ष के नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर बीजेपी जिस तरह सवाल उठा रही है, उससे साफ है कि यह मुद्दा केवल एक समारोह तक सीमित रहने वाला नहीं है। दूसरी ओर कांग्रेस भी अपने नेताओं के फैसले को प्रोटोकॉल के सवाल से जोड़कर सरकार पर जवाबदेही तय करने का दबाव बनाएगी।



