TMC विवाद में चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, ममता गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ और बागी गुट को ‘लिफाफा’

पुराने नाम और ‘फूल-घास’ वाले चुनाव चिह्न पर रोक के बाद आयोग ने दोनों गुटों को अस्थायी पहचान दी, जानिए ममता और ऋतब्रत बनर्जी गुट को क्या मिला

तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रही खींचतान के बीच निर्वाचन आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव निशान आवंटित कर दिए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम के साथ फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न मिला है। वहीं ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और लिफाफा चुनाव निशान दिया गया है।

यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों के लिए लागू की गई है। इससे पहले आयोग ने TMC के मूल नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

क्यों बदलना पड़ा TMC का नाम और निशान?

दरअसल, पार्टी के दोनों गुटों ने संगठन और उसके नाम-चिह्न पर अपना दावा पेश किया था। विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों पक्षों को फिलहाल मूल पार्टी का नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया।

आयोग ने दोनों गुटों से तीन-तीन वैकल्पिक नाम और मुक्त चुनाव चिह्नों में से तीन-तीन विकल्प देने को कहा था। इसके बाद शुक्रवार को दोनों पक्षों के प्रस्तावों पर विचार करके आयोग ने अस्थायी नाम और निशान आवंटित किए।

ममता गुट को क्या मिला?

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है। इसके साथ चुनाव चिह्न के तौर पर फुटबॉल खिलाड़ी आवंटित किया गया है।

ममता गुट ने आयोग को कई नाम और निशान सुझाए थे। इनमें क्रिकेट बैट और बिना गेंद वाला फुटबॉल खिलाड़ी भी शामिल था। आयोग ने इन्हीं विकल्पों में से फुटबॉल खिलाड़ी के निशान को मंजूरी दी।

ऋतब्रत गुट को मिला ‘लिफाफा’

दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है। इस गुट के लिए आयोग ने लिफाफा चुनाव चिह्न निर्धारित किया है।

इससे आगामी उपचुनावों में दोनों गुटों की पहचान अलग-अलग होगी और मतपत्र या ईवीएम पर पुराने TMC नाम और पारंपरिक निशान का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

किन चुनावों के लिए लागू है यह व्यवस्था?

निर्वाचन आयोग का यह अंतरिम इंतजाम आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इसके अलावा असम की नगांव लोकसभा सीट भी इस चुनावी प्रक्रिया में शामिल है।

आयोग ने कहा है कि यह व्यवस्था अंतिम निर्णय आने तक प्रभावी रहेगी। यानी अभी यह तय नहीं हुआ है कि पार्टी के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार किस गुट का होगा।

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आयोग के सामने अब असली विवाद क्या है?

TMC के दोनों गुट संगठन पर अपना दावा कर रहे हैं और इसी को लेकर चुनाव आयोग के सामने दस्तावेज और पक्ष रखे गए हैं। आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फिलहाल ऐसा अंतरिम रास्ता अपनाया है, जिससे आगामी उपचुनावों में दोनों गुट अलग-अलग नाम और निशान के साथ चुनाव लड़ सकें।

आयोग का अंतिम फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल भविष्य में किस पक्ष को मिलेगा। तब तक ममता गुट और ऋतब्रत गुट को चुनावी मैदान में अपनी नई अस्थायी पहचान के साथ उतरना होगा।

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