मुन्ना विश्वकर्मा और अमरनाथ विश्वकर्मा के नेतृत्व में वीरभानपुर से पांडेश्वर नाथ धाम, पंडिला तक गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। धाम पहुंचने पर भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना, आरती तथा प्रसाद वितरण किया गया। इसके बाद सामाजिक परिचर्चा और विशाल भंडारे का आयोजन हुआ।
मुख्य अतिथि डॉ. बिंदू विश्वकर्मा (विनीता हॉस्पिटल, फाफामऊ) ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजन, निर्माण और तकनीकी कौशल के प्रतीक हैं तथा उनका जीवन कर्म और निष्ठा का संदेश देता है। डॉ. सुनील विश्वकर्मा ने विश्वकर्मा पूजा को श्रम, हुनर और तकनीकी दक्षता के सम्मान का पर्व बताया। उप निदेशक कृषि पवन विश्वकर्मा ने समाज की एकता और परंपराओं को मजबूत करने में ऐसे आयोजनों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि अनिल विश्वकर्मा (जेलर, जिला कारागार नैनी) ने सामाजिक एकजुटता पर जोर दिया। वहीं संतोष विश्वकर्मा ने नई पीढ़ी को संस्कृति और विरासत से जोड़ने की आवश्यकता बताई। पंकज मनु ने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी समाज की मजबूती का संकेत है। कार्यक्रम का संचालन राम मूरत विश्वकर्मा ने किया।
इस दौरान डॉ. बिंदू विश्वकर्मा ने अतिथियों को भगवान विश्वकर्मा का चित्र और अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम की सफलता में स्वामी लव पांचाल, लता विश्वकर्मा, पुष्पा विश्वकर्मा, पंकज विश्वकर्मा (मार्केटिंग इंस्पेक्टर), संदीप विश्वकर्मा (आयकर निरीक्षक), ईश्वर चंद्र विश्वकर्मा, कमलेश शर्मा, युवा समाजसेवी आकाश, डॉ. वंशराज, डॉ. अमित, मनोज पांडेय, दूधनाथ पटेल, रामअचल यादव, बृजलाल, जयप्रकाश, सुनील कुमार, विशाल, रोहित, सदाशिव, लक्ष्मीकांत पटेल, सुरेश, संगम लाल, मुकुन्दलाल, रमेश चन्द्र, रामविशाल, ज्ञानचन्द्र और राजू सहित हजारों समाजजनों व स्थानीय नागरिकों का विशेष सहयोग रहा।