4 राज्यों के पुरुषों को नौकरी नहीं देंगे बेंगलुरु के CEO! X पोस्ट के बाद मचा बवाल, जानें क्या है पूरा मामला

A1 Sports World के CEO कार्तिक एसजी ने UP, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के पुरुष उम्मीदवारों की भर्ती पर रोक लगाने की बात कही

बेंगलुरु स्थित A1 Sports World के फाउंडर और CEO कार्तिक एसजी का एक सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्तिक ने X पर घोषणा की कि उनकी कंपनी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी नहीं देगी। उनके मुताबिक, यह फैसला कंपनी के भीतर हुई लंबी चर्चा के बाद लिया गया है।

CEO के इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने इसे कार्यस्थल की सुरक्षा से जुड़ा फैसला बताया, जबकि कई लोगों ने सवाल उठाया कि किसी एक कर्मचारी से जुड़े कथित व्यवहार के आधार पर चार राज्यों के सभी पुरुष उम्मीदवारों के लिए एक जैसी भर्ती नीति कैसे लागू की जा सकती है।

X पर CEO ने क्या ऐलान किया?

कार्तिक एसजी ने 22 सितंबर को X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी कंपनी की नई भर्ती नीति की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि लंबी चर्चा और बहस के बाद कंपनी ने तय किया है कि उत्तर भारत के चार राज्यों से आने वाले किसी भी पुरुष उम्मीदवार को नौकरी नहीं दी जाएगी।

इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी में राजस्थान की एक महिला कर्मचारी पहले से काम कर रही हैं और उनके मुताबिक उन्होंने इस फैसले का समर्थन किया है।

पोस्ट सामने आने के बाद यह मामला तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गया। चर्चा का मुख्य मुद्दा यह रहा कि भर्ती के दौरान उम्मीदवार के व्यक्तिगत आचरण और योग्यता के बजाय उसके राज्य को आधार बनाने की नीति कितनी उचित है।

आखिर क्यों लिया गया ऐसा फैसला?

कार्तिक एसजी ने बाद की पोस्ट में इस फैसले के पीछे एक पूर्व कर्मचारी से जुड़ी घटना का हवाला दिया। उनके मुताबिक, करीब दो सप्ताह पहले कंपनी ने एक कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया था। CEO का दावा है कि महिला कर्मचारियों के साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार को लेकर उस कर्मचारी को दो बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद उसका व्यवहार नहीं बदला।

कार्तिक ने आरोप लगाया कि कर्मचारी ने एक महिला सहकर्मी के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश भी की। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी में कम उम्र के लोग भी काम करते हैं और ऐसे माहौल में कर्मचारियों की सुरक्षा उनके लिए कारोबार से ज्यादा महत्वपूर्ण है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।

CEO ने यह भी कहा कि संबंधित कर्मचारी का शुरुआती बैकग्राउंड चेक सामान्य था। उनके मुताबिक, उसका रिज्यूमे और शैक्षणिक रिकॉर्ड भी ठीक था, लेकिन नौकरी शुरू करने के लगभग दो महीने बाद उसके व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आईं।

आलोचना के बाद भी फैसले पर कायम CEO

सोशल मीडिया पर आलोचना बढ़ने के बाद कार्तिक ने अपने फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि वह इस नीति पर कायम हैं। उनका तर्क है कि कंपनी में बच्चों और युवाओं के साथ काम किया जाता है, इसलिए कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

हालांकि, उनके फैसले पर सवाल उठाने वाले यूजर्स का कहना है कि किसी कर्मचारी के कथित गलत व्यवहार के लिए उसके राज्य या क्षेत्र से जुड़े सभी पुरुष उम्मीदवारों को एक ही नजर से देखना व्यक्तिगत जिम्मेदारी के सिद्धांत से अलग है। कुछ प्रतिक्रियाओं में कहा गया कि कंपनियों को भर्ती के दौरान उम्मीदवार की योग्यता, व्यवहार और आवश्यक जांच के आधार पर फैसला लेना चाहिए।

कंपनी में कितने कर्मचारी हैं?

कार्तिक ने अपनी पोस्ट में कंपनी के कर्मचारियों से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। उनके अनुसार, A1 Sports World में कुल 32 कर्मचारी हैं, जिनमें 14 महिलाएं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के करीब 20 कर्मचारी दक्षिण भारत के बाहर के राज्यों से आते हैं, जिनमें 12 गैर-दक्षिण भारतीय राज्यों से हैं।

यानी CEO के अपने दावे के अनुसार, कंपनी में पहले से ही अलग-अलग राज्यों से आने वाले कर्मचारी काम कर रहे हैं। विवाद मुख्य रूप से नई भर्ती में चार राज्यों के पुरुष उम्मीदवारों को बाहर रखने के फैसले को लेकर है।

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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

CEO की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक पक्ष ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और किसी भी तरह के अनुचित व्यवहार के खिलाफ सख्त रुख की जरूरत पर जोर दिया। वहीं दूसरे पक्ष ने कहा कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी पूरे राज्य से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों को एक श्रेणी में रखना व्यापक सामान्यीकरण है।

इस पूरे मामले ने भर्ती प्रक्रिया, क्षेत्रीय पहचान और कार्यस्थल की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से CEO के सोशल मीडिया पोस्ट और उस पर आई प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। कंपनी की इस नीति का लंबे समय में क्या प्रभाव पड़ेगा और क्या इसमें आगे कोई बदलाव किया जाएगा, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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