Mukesh Sahani: ‘एक खून माफ होता तो ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते’, मुकेश सहनी के बयान से सियासी बवाल

SIR और मतदाता सूची को लेकर जारी विवाद के बीच VIP प्रमुख मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए विवादित टिप्पणी की। उपेंद्र कुशवाहा ने बयान की आलोचना की है।

Mukesh Sahani: विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसके बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। मीडिया से बातचीत के दौरान सहनी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इसी दौरान उन्होंने कहा कि अगर उन्हें एक हत्या माफ होने की इजाजत मिलती तो वह सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते।

सहनी के इस बयान पर राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रिया शुरू हो गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने भी सहनी की टिप्पणी की आलोचना की और कहा कि लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को गोली मारने जैसी बात कहना उचित नहीं है।

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर हमलावर हैं मुकेश सहनी

मुकेश सहनी लंबे समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। गुरुवार को भी उन्होंने इसी मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

सहनी ने दावा किया कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है और जनता के मताधिकार से जुड़े मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव नेताओं के लिए नहीं बल्कि जनता के लिए होते हैं और जनता के पास अपने प्रतिनिधियों को बदलने का अधिकार होना चाहिए।

हालांकि, सहनी की ओर से चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक दावे हैं। इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

‘लोकतंत्र को कुचला जा रहा है’, सहनी ने लगाए कई आरोप

VIP प्रमुख ने अपने बयान में प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है और संविधान की मूल भावना के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

सहनी ने पश्चिम बंगाल और बिहार की चुनावी प्रक्रिया का भी जिक्र किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया। इसके अलावा उन्होंने बिहार में चुनाव के दौरान खातों में पैसे ट्रांसफर किए जाने का भी आरोप लगाया।

इन दावों को लेकर सहनी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि अगर चुनाव प्रक्रिया पर ही लोगों का भरोसा नहीं रहेगा तो लोकतंत्र की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होंगे।

‘एक खून माफ होता तो गोली मार देते’

SIR को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें एक खून माफ होता तो वह सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते।

यही बयान अब पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को लेकर इस तरह की हिंसक टिप्पणी किए जाने के बाद सहनी की आलोचना शुरू हो गई। उनके बयान को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि राजनीतिक विरोध दर्ज कराने के लिए नेताओं की भाषा की क्या सीमा होनी चाहिए।

सहनी ने इसके साथ ही चुनाव आयोग की मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर चुनावों में जनता के जनादेश पर ही सवाल उठने लगें तो फिर चुनाव कराने की प्रक्रिया पर भी विचार होना चाहिए।

उपेंद्र कुशवाहा ने की सहनी के बयान की आलोचना

मुकेश सहनी के बयान पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को गोली मारने जैसी बात कहना गंभीर विषय है।

कुशवाहा ने सहनी के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणी को किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

इस प्रतिक्रिया के बाद मामला और राजनीतिक चर्चा में आ गया है। एक तरफ सहनी SIR और चुनाव आयोग को लेकर अपने आरोपों को दोहरा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके बयान की भाषा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

SIR और चुनाव आयोग को लेकर पहले से जारी है विवाद

मुकेश सहनी का बयान ऐसे समय आया है जब देश में SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस पहले से चल रही है। विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

हाल में चुनाव आयोग के भीतर कुछ मुद्दों पर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर भी रिपोर्टें सामने आई हैं। इन रिपोर्टों में SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है।

वहीं चुनाव आयोग का पक्ष है कि वह एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और उसके भीतर अलग-अलग राय, टिप्पणियां तथा सुझाव देना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने कहा है कि उसकी कार्रवाई कानून और आयोग के निर्देशों के अनुरूप की जाती है।

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बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

मुकेश सहनी की टिप्पणी ने SIR और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। जहां सहनी चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर अपने आरोपों पर जोर दे रहे हैं, वहीं उनकी गोली मारने वाली टिप्पणी ने बहस का एक अलग मुद्दा खड़ा कर दिया है।

अब इस मामले में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है। फिलहाल विवाद का केंद्र एक तरफ SIR और मतदाता सूची से जुड़े सवाल हैं, तो दूसरी तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर मुकेश सहनी की विवादित टिप्पणी है।

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