Yuvraj Singh Manchanda: युवराज केस में पुलिस पर कोर्ट सख्त, शव की पहचान से पहले अंतिम संस्कार पर उठे गंभीर सवाल

Yuvraj Singh Manchanda: साकेत कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी, शव की पहचान, पोस्टमार्टम और ZIPNET प्रक्रिया को लेकर मांगा जवाब

Yuvraj Singh Manchanda: हरियाणा के चर्चित युवराज सिंह मंचंदा मौत मामले में साकेत कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पूछा कि जब शव की पहचान और कानूनी जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, तब उसका अंतिम संस्कार कैसे कर दिया गया। कोर्ट ने इस पूरे मामले को बेहद चिंताजनक बताते हुए पुलिस से कई बिंदुओं पर जवाब तलब किया है।

पहचान से पहले अंतिम संस्कार पर अदालत की नाराजगी

सुनवाई के दौरान युवराज की बहन हरसिमरन की ओर से दायर याचिका पर कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली की समीक्षा की। याचिकाकर्ता पक्ष ने दावा किया कि शव को अज्ञात मानकर अंतिम संस्कार कर दिया गया, जबकि पहचान से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं की गई थीं। अदालत ने यह भी पूछा कि शव के साथ मौजूद निजी सामान को सुरक्षित रखने के बजाय उसे भी क्यों जला दिया गया।

कोर्ट ने कहा कि किसी भी अज्ञात शव के मामले में पहचान सुनिश्चित करना और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले अंतिम संस्कार किए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मजिस्ट्रेट को सूचना क्यों नहीं दी गई?

अदालत ने गुरुग्राम पुलिस से यह भी पूछा कि 10 सितंबर को अज्ञात शव मिलने के बाद संबंधित कार्यकारी मजिस्ट्रेट या एसडीएम को समय पर सूचना क्यों नहीं दी गई। कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में मजिस्ट्रेट को सूचना देना और उनकी निगरानी में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करना नियमों का हिस्सा है।

न्यायालय ने संकेत दिया कि यदि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला हो सकता है।

ZIPNET और पहचान प्रक्रिया पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान ZIPNET पोर्टल का मुद्दा भी उठा। यह नेटवर्क विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच गुमशुदा व्यक्तियों और अज्ञात शवों की जानकारी साझा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अदालत ने पूछा कि शव मिलने के बाद उसकी जानकारी समय पर सिस्टम पर क्यों अपलोड नहीं की गई।

याचिका में दावा किया गया कि शव की पहचान से जुड़ी जानकारी निर्धारित समय पर साझा नहीं की गई, जिससे परिवार को अपने लापता सदस्य तक पहुंचने का अवसर नहीं मिल सका।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विरोधाभास

कोर्ट ने पोस्टमार्टम से जुड़े दस्तावेजों पर भी चिंता जताई। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ऐसी रिपोर्टें रखी गईं जिनमें मौत के कारणों को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए। इस पर कोर्ट ने पूछा कि एक ही मामले में मौत के कारण को लेकर अलग-अलग निष्कर्ष कैसे दर्ज किए गए।

अदालत ने विसरा सुरक्षित न रखे जाने और अन्य फोरेंसिक प्रक्रियाओं को लेकर भी पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा है।

परिवार के अधिकारों का भी उठा मुद्दा

साकेत कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि प्रक्रियागत लापरवाही हुई है तो इसका सबसे बड़ा असर मृतक के परिवार पर पड़ा है। अदालत ने कहा कि परिवार न केवल अपने सदस्य को खो चुका है, बल्कि उसे अंतिम संस्कार और अंतिम विदाई जैसी महत्वपूर्ण रस्में निभाने का अवसर भी नहीं मिला।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, युवराज सिंह मंचंदा 6 सितंबर को आखिरी बार दिखाई दिए थे। बाद में उनकी हत्या किए जाने और शव को ठिकाने लगाने का आरोप उनकी पूर्व सहकर्मी और उसके सहयोगी पर लगा। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपियों ने हत्या के बाद शव को छिपाने की कोशिश की और कई दिनों तक मामले को छुपाने का प्रयास किया।

वहीं, परिवार का आरोप है कि गुरुग्राम पुलिस ने अज्ञात शव मिलने के बाद पहचान और सूचना साझा करने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती। इसी संबंध में अदालत में याचिका दायर की गई है।

फिलहाल कोर्ट ने मामले में उठाए गए सवालों पर आदेश सुरक्षित रख लिया है। आने वाले दिनों में अदालत पुलिस से मांगे गए जवाबों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे का निर्णय ले सकती है।

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