IAS: IAS ट्रेनिंग के दौरान कितनी मिलती है सैलरी? LBSNAA में रहते हुए भी खाते में आती है रकम

IAS: मसूरी की LBSNAA में ट्रेनिंग के दौरान IAS अधिकारियों को मिलता है वेतन, मेस-हॉस्टल समेत तय कटौतियों के बाद खाते में आती है कम रकम

IAS: UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित उम्मीदवारों के लिए अगला बड़ा पड़ाव प्रशिक्षण होता है। मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में उन्हें प्रशासनिक सेवा की बारीकियों से परिचित कराया जाता है। लेकिन इस दौरान अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि जब अधिकारी ट्रेनिंग पर होते हैं, तब क्या उन्हें वेतन मिलता है?

इसका जवाब है हां। IAS अधिकारियों को प्रशिक्षण अवधि में भी वेतन मिलता है। हालांकि, खाते में आने वाली वास्तविक राशि बेसिक पे से कम होती है, क्योंकि ट्रेनिंग के दौरान मेस, हॉस्टल और अन्य निर्धारित मदों में कटौती की जाती है।

ट्रेनिंग के दौरान कितना होता है बेसिक पे?

LBSNAA में प्रशिक्षण ले रहे IAS अधिकारियों का शुरुआती बेसिक पे करीब 56,100 रुपये प्रतिमाह बताया जाता है। यह पे लेवल-10 के शुरुआती वेतनमान के अनुरूप है।

हालांकि यह पूरी राशि हर महीने खाते में नहीं आती। प्रशिक्षण के दौरान रहने, खाने और अन्य सुविधाओं से जुड़े निर्धारित खर्चों की कटौती की जाती है। इन कटौतियों के बाद ट्रेनिंग अधिकारी को मिलने वाली रकम कम हो जाती है।

खाते में कितनी रकम आती है?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार मेस और हॉस्टल शुल्क समेत अन्य निर्धारित कटौतियों के बाद IAS ट्रेनिंग अधिकारी को करीब 35,000 से 40,000 रुपये प्रतिमाह तक स्टाइपेंड/इन-हैंड राशि मिल सकती है।

यानी प्रशिक्षण के दौरान अधिकारी को वेतन मिलता है, लेकिन उसकी वास्तविक प्राप्त राशि बेसिक पे की तुलना में कम होती है।

सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं है IAS की ट्रेनिंग

LBSNAA की ट्रेनिंग का उद्देश्य केवल किताबों और क्लासरूम के जरिए प्रशासनिक जानकारी देना नहीं है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को सरकारी व्यवस्था और जमीनी प्रशासन से भी परिचित कराया जाता है।

ट्रेनिंग के शुरुआती चरण में फाउंडेशन कोर्स होता है, जिसमें IAS के अलावा विभिन्न सिविल सेवाओं के अधिकारी भी हिस्सा लेते हैं। इस दौरान भारतीय संविधान, कानून, अर्थव्यवस्था, इतिहास, प्रशासन और मैनेजमेंट जैसे विषयों की जानकारी दी जाती है।

भारत दर्शन से जिला प्रशिक्षण तक

IAS प्रशिक्षण के अलग-अलग चरणों में अधिकारियों को देश और प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से समझने का अवसर मिलता है। भारत दर्शन के दौरान उन्हें देश के विभिन्न क्षेत्रों और संस्थानों का अनुभव कराया जाता है।

इसके बाद प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा जिला प्रशिक्षण होता है। इसमें अधिकारी अपने आवंटित कैडर के जिले में जाकर जिला प्रशासन के कामकाज को समझते हैं। कलेक्टर कार्यालय और अन्य जिला स्तरीय संस्थाओं के साथ काम करके उन्हें प्रशासन की व्यावहारिक जानकारी मिलती है।

ट्रेनिंग में खेल और फिजिकल एक्टिविटी भी

LBSNAA में अधिकारियों की ट्रेनिंग केवल पढ़ाई और प्रशासनिक विषयों तक सीमित नहीं रहती। अकादमी में रहने के दौरान अधिकारियों के लिए खेल, शारीरिक गतिविधियां, ट्रैकिंग और अन्य गतिविधियां भी प्रशिक्षण का हिस्सा होती हैं।

अकादमी परिसर में आवास, लाइब्रेरी, अध्ययन क्षेत्र और खेल-कूद से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को एक समग्र वातावरण मिल सके।

जिला प्रशिक्षण में मिलता है जमीनी प्रशासन का अनुभव

जिला प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को करीब से देखने का मौका मिलता है।

धीरे-धीरे उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियों से भी जोड़ा जाता है, जिससे वे फील्ड में निर्णय लेने और सरकारी व्यवस्था को समझने का अनुभव हासिल कर सकें।

ट्रेनिंग खत्म होने के बाद क्या होता है?

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद IAS अधिकारी अपने संबंधित कैडर में नियुक्त होकर नियमित सेवा शुरू करते हैं। शुरुआती स्तर पर उनका बेसिक पे करीब 56,100 रुपये प्रतिमाह रहता है।

इसके अलावा पात्रता और नियमों के अनुसार महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा और चिकित्सा जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। सेवा में आगे बढ़ने के साथ पद और वेतनमान में भी बदलाव होता है। वरिष्ठ स्तर पर IAS अधिकारियों का बेसिक वेतन एक लाख रुपये प्रतिमाह से अधिक हो सकता है।

UPSC उम्मीदवारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह जानकारी?

IAS की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए यह जानना उपयोगी है कि चयन के बाद ट्रेनिंग अवधि को केवल पढ़ाई का समय नहीं माना जाता। इस दौरान अधिकारी सरकारी सेवा का हिस्सा होते हैं और उन्हें प्रशिक्षण के साथ वेतन भी मिलता है।

हालांकि, वास्तविक इन-हैंड राशि संबंधित कटौतियों और लागू नियमों के आधार पर अलग हो सकती है।

Related Articles

Back to top button