Smit Machchhar: ‘मैंने आखिरी ताकत लगा दी थी’, नेतन्याहू से बोले कैप्टन स्मित माछर- ऐसे बची 174 लोगों की जान

Smit Machchhar: फ्लाईदुबई की FZ1073 में सह-पायलट के हमले के बाद तेजी से नीचे जा रहा था विमान, घायल कैप्टन ने दो बार खोला कॉकपिट का दरवाजा

Smit Machchhar: फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान FZ1073 में हुए भयावह कॉकपिट हमले के बाद भारतीय कैप्टन स्मित माछर ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत में उस पूरे घटनाक्रम की जानकारी साझा की। बातचीत में उन्होंने बताया कि किस तरह सह-पायलट के हमले के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गए, उनकी नजर धुंधली होने लगी और इसी दौरान विमान तेजी से नीचे जाने लगा। इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश जारी रखी।

नेतन्याहू ने माछर के साहस की तारीफ करते हुए उन्हें भारत, इजरायल और पूरी दुनिया का हीरो बताया। उन्होंने माछर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अगले इजरायली स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया। यह सम्मान आम तौर पर इजरायली नागरिकों को दिया जाता है, हालांकि इस चयन के लिए निर्धारित आधिकारिक प्रक्रिया भी होती है।

प्रार्थना के लिए उठे सह-पायलट, कुछ देर बाद हुआ हमला

कैप्टन माछर ने बातचीत के दौरान बताया कि उड़ान शुरू में बिल्कुल सामान्य थी। कुछ समय बाद सह-पायलट ने उनसे प्रार्थना करने की बात कही। माछर ने उसके धार्मिक विश्वास का सम्मान करते हुए अपना ध्यान दूसरी ओर कर लिया।

करीब चार से पांच मिनट बाद उन्हें सिर के पीछे जोरदार प्रहार महसूस हुआ। शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद विमान में कोई बड़ी तकनीकी समस्या या बाहरी नुकसान हुआ है। लेकिन जब लगातार वार होने लगे तो उन्हें समझ आया कि हमला विमान की किसी खराबी के कारण नहीं, बल्कि कॉकपिट में मौजूद सह-पायलट कर रहा है।

हमले के बीच तेजी से नीचे जाने लगा विमान

हमले के दौरान माछर ने विमान की स्थिति को भी महसूस किया। उन्हें पता चला कि विमान सामान्य ऊंचाई पर नहीं रह गया है और तेजी से नीचे जा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार विमान करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई से लगभग 90 सेकंड में 17 हजार फीट से अधिक नीचे आया। इस दौरान आपात संकेत भेजे गए और विमान को बाद में सऊदी अरब के तबूक की ओर मोड़ दिया गया।

धुंधली नजर के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोला

गंभीर चोटों के कारण माछर की नजर धुंधली हो चुकी थी। इसके बावजूद उन्होंने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने एक बार कॉकपिट का दरवाजा खोला, लेकिन सह-पायलट ने उसे दोबारा बंद कर दिया।

माछर ने बताया कि उस समय उन्हें लग रहा था कि यदि कॉकपिट का दरवाजा नहीं खुला तो विमान में मौजूद लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और दोबारा दरवाजा खोलने में सफल रहे। इसके बाद अन्य क्रू सदस्यों और यात्रियों को अंदर पहुंचकर स्थिति संभालने का मौका मिला।

यात्रियों और दूसरे पायलटों ने भी संभाला मोर्चा

कॉकपिट का दरवाजा खुलने के बाद विमान में मौजूद अन्य लोगों ने हस्तक्षेप किया। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ ऑफ-ड्यूटी पायलट भी विमान में मौजूद थे, जिन्होंने विमान को स्थिर करने और स्थिति पर नियंत्रण पाने में मदद की।

इसके बाद फ्लाइट को सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा गया। घटना के बाद दोनों पायलटों को चिकित्सा सहायता दी गई।

नेतन्याहू ने कहा- आपका साहस असाधारण

बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने कैप्टन माछर के साहस की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बेहद कठिन परिस्थिति में माछर ने संयम बनाए रखा और यात्रियों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इजरायली प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत और इजरायल के बहादुर लोगों का सच्चा हीरो बताते हुए पूरी दुनिया का भी नायक कहा।

माछर और पीएम मोदी को इजरायल आने का न्योता

नेतन्याहू ने बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैप्टन माछर को इजरायल के अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उन्होंने दोनों को समारोह में मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया।

यह इजरायल में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक सम्मान माना जाता है। हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक मशाल जलाने वालों के चयन के लिए एक औपचारिक प्रक्रिया होती है और अंतिम चयन केवल प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत निमंत्रण से तय नहीं होता।

सह-पायलट को लेकर जांच जारी

घटना में सह-पायलट की पहचान को लेकर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में ओमानी नागरिक हमाम अल-हम्मामी का नाम सामने आया है। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और घटना के पीछे की मंशा तथा संभावित सुरक्षा पहलुओं की जांच कई स्तरों पर की जा रही है।

फ्लाइट FZ1073 में हुए इस घटनाक्रम ने कॉकपिट के अंदरूनी सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर भी कई सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर यह तथ्य जांच के केंद्र में है कि कॉकपिट के अंदर मौजूद एक क्रू सदस्य ने दूसरे पायलट पर हमला कैसे किया और विमान के नियंत्रण को खतरे में डालने की स्थिति कैसे बनी।

अबूधाबी में चल रहा इलाज

घटना के बाद कैप्टन स्मित माछर को शुरुआती चिकित्सा सहायता सऊदी अरब के तबूक में दी गई। इसके बाद उन्हें आगे के उपचार के लिए अबूधाबी ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में माछर द्वारा घायल अवस्था में कॉकपिट का दरवाजा खोलना सबसे अहम क्षणों में से एक रहा। इसी के बाद अन्य लोगों को अंदर पहुंचकर विमान को बचाने और हमलावर को काबू करने का अवसर मिला।

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