India Largest Movement: 25 करोड़ लोगों की भागीदारी का दावा! भारत के सबसे बड़े जन आंदोलन की कहानी
India Largest Movement: स्वतंत्र भारत में कई बड़े आंदोलन हुए, लेकिन एक आंदोलन ने भागीदारी और प्रभाव के मामले में सभी रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए।
India Largest Movement: भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कई ऐसे आंदोलन हुए हैं जिन्होंने सरकारों की नीतियों, राजनीतिक फैसलों और जनता की सोच पर गहरा प्रभाव डाला। आजादी के बाद देश ने समय-समय पर बड़े जन आंदोलनों को देखा, लेकिन जब सबसे बड़े जन आंदोलन की बात होती है तो 2020-21 के किसान आंदोलन का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन नवंबर 2020 में दिल्ली की सीमाओं तक पहुंचा और कई महीनों तक जारी रहा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों के किसान बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए। आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी अवधि और व्यापक जनभागीदारी रही। देशभर में आयोजित बंद, धरनों और विरोध प्रदर्शनों ने इसे राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन बना दिया।
मीडिया रिपोर्टों और विभिन्न संगठनों के दावों के अनुसार, आंदोलन के दौरान आयोजित भारत बंद में करीब 25 करोड़ लोगों की भागीदारी दर्ज किए जाने का दावा किया गया था। यही कारण है कि इसे स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े जन आंदोलनों में गिना जाता है। दिल्ली की सीमाओं पर महीनों तक किसानों का डेरा रहा और हजारों ट्रैक्टर, टेंट तथा अस्थायी शिविर इस आंदोलन की पहचान बन गए।
हालांकि इससे पहले भी कई ऐसे आंदोलन हुए जिन्होंने देश की राजनीति को नई दिशा दी। वर्ष 1974 में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चला संपूर्ण क्रांति आंदोलन तत्कालीन राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ एक बड़ी जनलहर बनकर उभरा था। इस आंदोलन ने देश में व्यापक राजनीतिक बदलाव की भूमिका तैयार की और बाद में आपातकाल तथा उसके बाद की राजनीति पर भी असर डाला।
इसके अलावा वर्ष 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में चला भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन भी स्वतंत्र भारत के सबसे चर्चित आंदोलनों में शामिल है। दिल्ली के रामलीला मैदान से शुरू हुई इस मुहिम को देशभर से समर्थन मिला और लाखों लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए सड़कों पर उतरे।
इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि किसी भी आंदोलन की ताकत सिर्फ भीड़ से नहीं, बल्कि उसके सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव से भी तय होती है। इसी वजह से किसान आंदोलन, जेपी आंदोलन और अन्ना आंदोलन को स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली जन आंदोलनों में शामिल किया जाता है।
भारत का लोकतंत्र जन आंदोलनों की इसी परंपरा से मजबूत हुआ है, जहां जनता समय-समय पर अपनी मांगों और अधिकारों को लेकर संगठित होकर आवाज उठाती रही है।


