International News: ‘मुझे नोबेल प्राइज मिलना चाहिए, मैंने अब तक 8 वॉर सेटल किए, डींग नहीं…’, ट्रंप का फिर छलका नोबेल प्रेम

डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान समेत 8 संघर्षों को सुलझाने का क्रेडिट लिया और नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी फिर दोहराई।

International News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अपनी इच्छा जाहिर की है। ट्रंप ने दावा किया कि राष्ट्रपति के तौर पर उन्होंने ऐसे काम किए हैं, जो उनसे पहले किसी अन्य राष्ट्रपति ने नहीं किए। उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत कई संघर्षों को सुलझाने का क्रेडिट भी खुद को दिया और कहा कि उन्होंने अब तक आठ युद्धों को खत्म कराने में भूमिका निभाई है।

व्हाइट हाउस लौटने के बाद पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने अपने दावों को दोहराते हुए कहा कि वह किसी तरह की डींग नहीं हांक रहे हैं, बल्कि केवल तथ्यों की बात कर रहे हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा होने वाली है।

‘मैं डींग नहीं हांक रहा, सिर्फ सच बता रहा हूं’

पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ऐसे काम किए हैं, जो शायद ही किसी और राष्ट्रपति ने किए होंगे। उन्होंने कहा कि आम तौर पर किसी राष्ट्रपति के कार्यकाल में युद्धों को सुलझाना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन उन्होंने कई संघर्षों को खत्म कराने में सफलता हासिल की है।

ट्रंप ने कहा, “मैंने ऐसा काम किया है जो किसी और ने कभी नहीं किया होगा। मैं डींग नहीं हांक रहा हूं, बस असलियत बता रहा हूं। शायद ही किसी राष्ट्रपति ने कभी कोई युद्ध सुलझाया हो और मुझे देखो, मैंने 8 युद्ध सुलझाए हैं।”

ट्रंप के इस बयान को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उनकी लंबे समय से चली आ रही दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। वह कई मौकों पर कह चुके हैं कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को खत्म कराने की उनकी कोशिशों को देखते हुए उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

भारत-पाकिस्तान समेत 8 संघर्षों का लिया क्रेडिट

डोनाल्ड ट्रंप पहले भी दावा करते रहे हैं कि उन्होंने अलग-अलग देशों के बीच चल रहे कई संघर्षों को खत्म कराने में अहम भूमिका निभाई। इनमें भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का मुद्दा भी शामिल है।

इसके अलावा ट्रंप ने आर्मेनिया और अजरबैजान समेत अन्य संघर्षों को सुलझाने का श्रेय भी अपने प्रशासन को दिया है। उनका कहना है कि उनकी कूटनीतिक कोशिशों के कारण कई ऐसे युद्ध और संघर्ष रुके, जिनके लंबे समय तक जारी रहने की आशंका थी।

हालांकि, भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम तक पहुंचने में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी। नई दिल्ली का लगातार कहना रहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत और सैन्य कार्रवाई से जुड़े फैसले द्विपक्षीय स्तर पर हुए।

ईरान को लेकर भी ट्रंप ने दिया संकेत

ट्रंप ने अपनी बातचीत में ईरान के साथ जारी तनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने संकेत दिया कि अगर इस मोर्चे पर भी कोई समझौता होता है तो उनकी बताई गई सूची में एक और संघर्ष जुड़ सकता है।

ट्रंप सत्ता में वापसी के बाद से लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उनकी विदेश नीति का एक बड़ा लक्ष्य दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे युद्धों और संघर्षों को खत्म करना है। नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर भी वह कई बार सार्वजनिक रूप से अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं।

शुक्रवार को होगा 2026 नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान

2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा नॉर्वे की नोबेल समिति शुक्रवार को करेगी। जब ट्रंप से पुरस्कार को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि समिति क्या फैसला करेगी।

ट्रंप ने कहा कि नोबेल समिति की ऐसी छवि रही है कि शायद वह उनके जैसे लोगों को यह पुरस्कार नहीं देती। इसके साथ ही उन्होंने अपने पहले कार्यकाल के दौरान उत्तर कोरिया के साथ हुई कूटनीतिक कोशिशों का भी जिक्र किया।

ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ अपनी बैठकों को भी अपनी विदेश नीति की उपलब्धियों में गिनाया है। 2018 में नॉर्वे के दो राजनेताओं ने ट्रंप को किम जोंग-उन के साथ उनकी शिखर वार्ता के बाद नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की बात कही थी।

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ओबामा को नोबेल मिलने पर भी साधा निशाना

ट्रंप ने इस दौरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि ओबामा को नोबेल शांति पुरस्कार आखिर किस आधार पर दिया गया था।

ट्रंप ने कहा कि ओबामा ने अपने कार्यकाल में ऐसा कुछ नहीं किया था, जिसके लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया जाना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि ओबामा को राष्ट्रपति चुने जाने के शुरुआती दौर में ही नोबेल पुरस्कार मिल गया था और उन्हें खुद भी यह नहीं पता था कि उन्हें यह सम्मान क्यों दिया गया।

डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर यह बयान एक बार फिर चर्चा में है। अब सबकी नजर शुक्रवार को होने वाली 2026 नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा पर है कि नॉर्वे की नोबेल समिति इस बार किसे दुनिया के इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुनती है।

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