Teacher Felicitation Ceremony: उन्नाव में हजारों शिक्षकों का सम्मान, प्रवीण मिश्रा भानू और श्वेता भानू मिश्रा ने किया सम्मानित
Teacher Felicitation Ceremony: कब्बा खेड़ा स्थित अरोड़ा रिसॉर्ट में आयोजित समारोह में गुरुजनों को अंगवस्त्र, माला और प्रतीक चिह्न भेंट किए गए; वक्ताओं ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
Teacher Felicitation Ceremony: शिक्षक समाज को दिशा देने और राष्ट्र के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके ज्ञान, अनुभव, संस्कार और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों का व्यक्तित्व विकसित होता है तथा समाज को जिम्मेदार नागरिक मिलते हैं। इसी भावना के साथ शनिवार को उन्नाव के कब्बा खेड़ा स्थित अरोड़ा रिसॉर्ट के लॉन-2 में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में निवर्तमान जिलाध्यक्ष भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रवीण मिश्रा ‘भानू’ और नगर पालिका परिषद उन्नाव की अध्यक्ष श्वेता भानू मिश्रा ने हजारों शिक्षकों को अंगवस्त्र, माला और प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।
समारोह का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त करना और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित करना रहा। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता की भावना दिखाई दी। सम्मान प्राप्त करने वाले गुरुजनों के चेहरों पर प्रसन्नता नजर आई।
शिक्षकों का योगदान पीढ़ियों को देता है नई दिशा : प्रवीण मिश्रा भानू
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रवीण मिश्रा ‘भानू’ ने कहा कि शिक्षक केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने, कठिन परिस्थितियों का सामना करने और सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा भी देते हैं। वे बच्चों में अनुशासन, नैतिकता, संस्कार और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का परिश्रम केवल किसी एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव कई पीढ़ियों पर पड़ता है। शिक्षकों के मार्गदर्शन से विद्यार्थी अपने जीवन में सफलता हासिल करने के साथ समाज के विकास में भी योगदान देते हैं। ऐसे में गुरुजनों का सम्मान करना महज औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके प्रति कृतज्ञता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है।
प्रवीण मिश्रा ने कहा कि शिक्षकों का स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने गुरुजनों के योगदान को याद करते हुए उनके प्रति सम्मान की भावना बनाए रखने पर जोर दिया।
राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अहम : श्वेता भानू मिश्रा
नगर पालिका परिषद उन्नाव की अध्यक्ष श्वेता भानू मिश्रा ने कहा कि शिक्षकों के मार्गदर्शन से विद्यार्थी अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते हैं और भविष्य में समाज तथा राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण के माध्यम से विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों का योगदान अतुलनीय है। शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ जिम्मेदारी, सामाजिक चेतना और अच्छे संस्कार विकसित होते हैं। इसलिए शिक्षकों का सम्मान करना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने सभी से गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, आदर और कृतज्ञता की भावना को बनाए रखने का आह्वान किया।
अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न देकर किया गया सम्मान
समारोह में प्रवीण मिश्रा ‘भानू’ और श्वेता भानू मिश्रा ने उपस्थित शिक्षकों को अंगवस्त्र पहनाकर, माला पहनाकर तथा प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। आयोजन के दौरान शिक्षकों के अनुभवों और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में शिक्षक नेता वेणु रंजन भदौरिया, रमाशंकर मिश्रा, हरिहर दीक्षित, वीना सिन्हा, मनोज श्रीवास्तव, कल्पना अवस्थी, शिवबालक रामसरोज, कृष्ण शंकर कुशवाहा, महेंद्र प्रताप वर्मा, रति भान सिंह, वाई.एन. सिंह, डॉ. राम नरेश, भरत चित्रांशी, विवेक तिवारी, ब्रजेश पांडेय, के.एस. मिश्रा, अनुपम मिश्रा, वेद मिश्रा, अर्पित मिश्रा, सचिन मिश्रा, सुधाकर तिवारी, मंजू कनौजिया, विनय मिश्रा और आलोक अवस्थी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। आयोजकों के अनुसार, समारोह में हजारों शिक्षकों ने भाग लिया।
वरिष्ठ और महिला शिक्षकों ने पहल की सराहना की
समारोह में शामिल सेवानिवृत्त वरिष्ठ शिक्षकों और महिला शिक्षकों ने प्रवीण मिश्रा ‘भानू’ एवं श्वेता भानू मिश्रा की इस पहल की सराहना की और उनके प्रति आभार व्यक्त किया। वरिष्ठ शिक्षकों के अनुभवों और मार्गदर्शन से कार्यक्रम का वातावरण भावपूर्ण और प्रेरणादायी बना रहा।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी सम्मानित गुरुजनों के प्रति आभार जताया और उनके स्वस्थ, सुखद एवं सम्मानपूर्ण जीवन की कामना की। समारोह के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शिक्षकों का सम्मान केवल किसी आयोजन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज में उनके योगदान को निरंतर स्वीकार किया जाना चाहिए। गुरुजनों के प्रति आदर और कृतज्ञता की भावना शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।



