Supreme Court: दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र समेत पुलिस, मेट्रो और रेलवे को नोटिस
Supreme Court: मेट्रो-रेल और इंटरनेट सेवाएं निर्बाध रखने का निर्देश, बैरिकेडिंग की समीक्षा करने तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गैरकानूनी हिरासत से बचाने को कहा
Supreme Court: दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों और मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) और रेलवे को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने शहर में आम लोगों की आवाजाही, सार्वजनिक परिवहन और इंटरनेट सेवाओं को सामान्य बनाए रखने के साथ ही सुरक्षा के नाम पर लगाई गई बैरिकेडिंग की जरूरत की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों और मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले से जुड़ा है। प्रदर्शन को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अधिकारियों से कानूनी दायित्वों और मौलिक अधिकारों के पालन के संबंध में जवाब मांगा।
सुप्रीम कोर्ट के पांच प्रमुख निर्देश
अदालत ने सार्वजनिक सुविधाओं और नागरिकों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए पांच प्रमुख निर्देश दिए।
1. मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रहें: अदालत ने कहा कि मेट्रो और रेल सेवाओं का संचालन सामान्य रूप से जारी रहना चाहिए। किसी तरह की पाबंदी तभी लगाई जाए, जब सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों में कानून के तहत इसकी आवश्यकता हो।
2. बैरिकेडिंग की समीक्षा हो: शहर में लोगों की आवाजाही और यातायात को अनावश्यक रूप से बाधित नहीं किया जाना चाहिए। अधिकारियों को बैरिकेडिंग की जरूरत और उससे होने वाली असुविधा की तत्काल समीक्षा करने को कहा गया है।
3. इंटरनेट सेवाएं निर्बाध रहें: अदालत ने कानून के अनुसार इंटरनेट सुविधाएं बिना अनावश्यक रुकावट के जारी रखने का निर्देश दिया।
4. आवागमन सुचारू रहे: लोगों को शहर में कानून के अनुरूप आने-जाने की सुविधा मिलनी चाहिए। यातायात प्रबंधन के नाम पर आम नागरिकों की आवाजाही पर अनुचित प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए।
5. हिरासत में लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया जरूरी: अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में नहीं लिया जा सकता। विशेष रूप से उन स्थानों पर शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई से बचने को कहा गया है, जहां संबंधित कानूनी प्रतिबंध लागू नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आसपास लगे बोर्ड हटाने का निर्देश
सुनवाई के दौरान अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 से संबंधित लगाए गए बोर्डों पर भी निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि यदि संबंधित बोर्ड अब तक नहीं हटाए गए हैं, तो उन्हें हटाया जाए, ताकि लोगों को न्यायालय तक पहुंचने और वहां आने-जाने में किसी प्रकार की बाधा या आशंका का सामना न करना पड़े।
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर जवाबदेही तय करने पर जोर
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्राप्त अधिकारों की रक्षा की गई है और कानूनी दायित्वों के उल्लंघन पर जवाब मांगा जाएगा। अदालत ने बिना पहचान चिह्न या बैज वाले पुलिसकर्मियों द्वारा बल प्रयोग किए जाने के मामले की जांच की बात भी कही।
न्यायमूर्ति बागची ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को रोकना अदालत की जिम्मेदारी है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन और नागरिक सुविधाओं पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि जहां संबंधित कानूनी प्रतिबंध लागू नहीं हैं, वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से बचा जाए। अदालत ने सार्वजनिक परिवहन, इंटरनेट सेवाओं और नागरिकों की आवाजाही को सामान्य बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अदालत के निर्देशों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन सुनिश्चित करना है। मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, DMRC और रेलवे से जवाब मांगा गया है।



