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Supreme Court: ‘कोई भी न्यायपालिका को धौंस नहीं दिखा सकता’, राहुल गांधी के धरने का जिक्र होने पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी

एसआईआर के खिलाफ राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग से जवाब तलब, जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी याचिका पर भी सुनवाई

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग और उसके शीर्ष अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की ओर से दायर इस याचिका में मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने की किसी भी कोशिश को लेकर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि कोई भी न्यायपालिका को धौंस नहीं दिखा सकता।

इस सुनवाई में एसआईआर के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन, अदालत के बाहर दिए गए बयानों और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की जगह को लेकर उठाए गए सवालों का भी जिक्र हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने एक तरफ चुनाव आयोग से जवाब मांगा, वहीं दूसरी तरफ स्पष्ट किया कि अदालत के सामने हर आवाज कीमती है और सभी पक्षों की बात सुनी जाएगी।

राहुल गांधी समेत 13 नेताओं की याचिका पर नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एसआईआर से संबंधित याचिका पर निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। याचिका में चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और इसके दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ताओं की मांग है कि मतदाता सूची से किसी का नाम हटाने से पहले उसे उचित नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का अवसर मिले। इसके अलावा, हटाए गए मतदाताओं की सूची बूथवार प्रकाशित करने की मांग भी की गई है। इसमें नाम हटाने के कारणों और संबंधित मतदाताओं के जनसांख्यिकीय विवरण का उल्लेख करने की बात कही गई है।

याचिका में यह भी जांचने का आग्रह किया गया है कि चुनाव आयोग की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयोग से संबंधित 2023 के कानून और टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप है या नहीं।

‘कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता’

सुनवाई के दौरान अदालत में राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की ओर से एसआईआर के खिलाफ किए गए विरोध प्रदर्शन का उल्लेख हुआ। इस संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अदालत बाहर हो रही घटनाओं और दिए जा रहे बयानों से अनजान नहीं है।

वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने राजनीतिक जुलूस और उससे जुड़े घटनाक्रम पर आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि करीब 200 वकीलों ने इस तरह दबाव बनाने की कथित कोशिश पर चिंता जताते हुए एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस पर सीजेआई ने कहा कि अदालत एकांत में नहीं बैठी है और उसे बाहर क्या हो रहा है, इसकी जानकारी है। उन्होंने ऐसे प्रयासों को कमजोर बताते हुए कहा कि उनसे अदालत के कामकाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर भी सवाल उठाया और कहा कि वह इस विषय पर संबंधित याचिकाकर्ता से पूछना चाहेगी। हालांकि, सुनवाई में नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने एसआईआर को लेकर लगाए गए आरोपों को सही मान लिया है। फिलहाल संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है।

याचिका में कौन-कौन से विपक्षी नेता शामिल?

एसआईआर के खिलाफ दाखिल याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, एनसीपी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत समेत अन्य विपक्षी नेता शामिल हैं।

यह याचिका 12 अक्टूबर को दायर की गई थी। शुरुआती प्रक्रियात्मक कमियों को दूर किए जाने के बाद 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इसे पंजीकृत किया। विपक्षी नेताओं ने एसआईआर की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

इसी सुनवाई के दौरान असदुद्दीन ओवैसी समेत अन्य नेताओं की ओर से चुनाव आयोग से संबंधित दाखिल याचिकाओं पर भी केंद्र सरकार और दूसरे पक्षों को नोटिस जारी किए गए। अदालत ने समान राहत मांगने वाली याचिकाओं को एक साथ रखने का निर्देश दिया, ताकि उनसे जुड़े मुद्दों पर संयुक्त रूप से सुनवाई की जा सके।

‘अदालत के सामने हर आवाज कीमती’

एसआईआर से जुड़ी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से संबंधित याचिका पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि उसके सामने हर आवाज कीमती है और सभी की बात सुनी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। यह मुद्दा प्रदर्शन करने के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन से जुड़ा है।

अदालत की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब एसआईआर के विरोध में विपक्षी दलों और विभिन्न समूहों की ओर से प्रदर्शन किए जा रहे हैं। हालांकि, अदालत में याचिका पर सुनवाई और उसके बाहर होने वाले राजनीतिक विरोध को अलग-अलग प्रक्रियाओं के रूप में देखना जरूरी है।

महिला पत्रकार के मामले में पुलिस को निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला पत्रकार से जुड़े मामले में भी निर्देश दिया। महिला पत्रकार ने प्रदर्शन को कवर करने के दौरान दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत पर यौन हमले और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था।

अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित याचिका पर विचार किए जाने तक महिला पत्रकार के खिलाफ पुलिस कोई कार्रवाई न करे। यह निर्देश मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया है। आरोपों की सच्चाई और संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी का निर्धारण आगे की न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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अब चुनाव आयोग के जवाब पर नजर

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब इस मामले में चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे। अदालत के सामने यह सवाल है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया किस तरह अपनाई जा रही है और मतदाताओं को अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ उचित अवसर मिल रहा है या नहीं।

विपक्षी दलों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, जबकि इन आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष भी सुनवाई में सामने आएगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर जवाब मांगा है। एसआईआर की वैधता और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर अंतिम निष्कर्ष आगे की सुनवाई और अदालत के आदेशों पर निर्भर करेगा।

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