US Midterm Elections: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में ट्रंप की साख दांव पर, रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच कड़ा मुकाबला
US Midterm Elections: कांग्रेस के दोनों सदनों की सीटों पर मतदान से तय होगा सत्ता का संतुलन, चुनावी नतीजे 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की दिशा भी कर सकते हैं प्रभावित।
US Midterm Elections: अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के बीच हो रहे इन चुनावों को उनकी लोकप्रियता और सरकार के कामकाज पर जनता की राय जानने की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। इस चुनाव में अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों- प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों के लिए मुकाबला है। इसके नतीजे तय करेंगे कि आने वाले समय में रिपब्लिकन पार्टी को संसद में अपना बहुमत बनाए रखने में सफलता मिलती है या डेमोक्रेटिक पार्टी अपनी स्थिति मजबूत करती है।
मतदान शुरू होने से पहले ही करीब 5 करोड़ बैलेट पोस्ट किए जा चुके हैं। हालांकि, इन चुनावों का सीधा असर राष्ट्रपति की कुर्सी पर नहीं पड़ेगा, लेकिन संसद में किस पार्टी का दबदबा रहेगा, यह ट्रंप की नीतियों और फैसलों को आगे बढ़ाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होगा।
अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में चुनाव
अमेरिका की संसद को कांग्रेस कहा जाता है। इसके दो सदन हैं- प्रतिनिधि सभा और सीनेट। प्रतिनिधि सभा में कुल 435 सीटें हैं और इसके सभी सदस्यों का चुनाव हर दो साल में होता है। पिछली बार नवंबर 2024 में इन सीटों के लिए मतदान हुआ था।
वहीं, सीनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं। सीनेटरों का कार्यकाल छह साल का होता है। इसलिए हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सीटों पर चुनाव कराया जाता है। इस बार सीनेट की करीब 35 सीटों पर मतदान हो रहा है।
मौजूदा स्थिति की बात करें तो प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के 218 और डेमोक्रेटिक पार्टी के 214 सदस्य हैं। वहीं, सीनेट में रिपब्लिकन के 53 और डेमोक्रेटिक पार्टी के 45 सीनेटर हैं। ऐसे में इस बार का चुनाव दोनों सदनों में राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।
चुनाव हारने से ट्रंप की राष्ट्रपति कुर्सी पर नहीं आएगा खतरा
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव का परिणाम राष्ट्रपति का कार्यकाल खत्म नहीं करता और न ही इससे राष्ट्रपति पद पर सीधा कोई असर पड़ता है। डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल में बने रहेंगे, चाहे उनकी पार्टी को चुनाव में जीत मिले या हार।
हालांकि, राष्ट्रपति के लिए बड़े कानूनों और नीतिगत प्रस्तावों को संसद से मंजूरी दिलाना आसान नहीं होगा, यदि उनकी पार्टी के पास कांग्रेस में पर्याप्त समर्थन न हो। अमेरिकी व्यवस्था में राष्ट्रपति के पास कार्यकारी शक्तियां होती हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण विधायी फैसलों के लिए कांग्रेस की सहमति जरूरी होती है।
रिपब्लिकन पार्टी के पिछड़ने पर मुश्किल हो सकती है ट्रंप की राह
यदि रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में अपना बहुमत गंवा देती है तो ट्रंप प्रशासन के लिए कई बड़े विधेयक पारित कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासतौर पर इमिग्रेशन, टैरिफ और सरकार के प्रमुख नीतिगत प्रस्तावों को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी का विरोध बढ़ सकता है।
इसके अलावा कांग्रेस में विपक्ष की ताकत बढ़ने पर राष्ट्रपति के फैसलों और प्रशासनिक कामकाज की निगरानी भी अधिक सख्त हो सकती है। हालांकि, राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियां बनी रहेंगी। वे कार्यकारी आदेश जारी कर सकते हैं और विदेश नीति तथा सैन्य मामलों में अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं। संसद से पारित विधेयकों पर वीटो का अधिकार भी राष्ट्रपति के पास रहता है।
मध्यावधि चुनाव का इतिहास ट्रंप के लिए चुनौतीपूर्ण
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों का पुराना रिकॉर्ड मौजूदा राष्ट्रपति की पार्टी के पक्ष में बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है। चुनावी इतिहास के मुताबिक, अब तक हुए 20 मध्यावधि चुनावों में से 18 बार राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है।
हालांकि, 1998 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और 2002 में जॉर्ज डब्ल्यू बुश के नेतृत्व वाली पार्टियों ने बेहतर प्रदर्शन किया था। ये दोनों चुनाव उस परंपरा के अपवाद माने जाते हैं।
ऐसे में ट्रंप के सामने भी अपनी पार्टी का प्रदर्शन बेहतर बनाए रखने की चुनौती है। यदि रिपब्लिकन पार्टी कमजोर होती है तो इसका असर उनके शेष कार्यकाल की राजनीतिक रणनीति पर पड़ सकता है।
सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त
चुनाव से पहले सामने आए अधिकतर सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी को रिपब्लिकन पार्टी के मुकाबले बढ़त मिलने का अनुमान जताया गया है। हालांकि, सर्वेक्षणों के अनुमान कितने सही साबित होते हैं, इसका फैसला वास्तविक मतदान और मतगणना के बाद ही होगा।
इस चुनाव को केवल कांग्रेस की सीटों का मुकाबला नहीं माना जा रहा है। इसके जरिए अमेरिकी मतदाता पिछले दो वर्षों में ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर भी अपनी राय जाहिर करेंगे।
ईरान, इजराइल और टैरिफ नीति पर भी जनता की राय
ट्रंप के कार्यकाल में ईरान से जुड़े संघर्ष, इजराइल के प्रति अमेरिकी नीति, रूस-यूक्रेन युद्ध और टैरिफ संबंधी फैसले अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में रहे हैं। मध्यावधि चुनाव के जरिए यह समझने का अवसर मिलेगा कि अमेरिकी मतदाता इन नीतियों और सरकार के कामकाज को किस नजरिए से देख रहे हैं।
इमिग्रेशन और व्यापार नीति भी चुनाव के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ट्रंप प्रशासन के फैसलों का चुनावी परिणामों पर कितना असर पड़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
2028 के राष्ट्रपति चुनाव पर भी पड़ सकता है असर
मध्यावधि चुनाव के नतीजे केवल मौजूदा सरकार के लिए ही नहीं, बल्कि 2028 में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिहाज से भी अहम माने जा रहे हैं। यदि रिपब्लिकन पार्टी अच्छा प्रदर्शन करती है तो ट्रंप की राजनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलने पर विपक्ष को आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए नई ऊर्जा और रणनीतिक आधार मिल सकता है।
अमेरिका में 4 नवंबर से चुनावी नतीजे सामने आने शुरू हो सकते हैं। ऐसे में इन चुनावों पर केवल अमेरिकी राजनीतिक दलों की ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।



