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Abhijeet Vanjari: नागपुर में अभिजीत वंजारी ने फिर जीती MLC सीट, भाजपा के गढ़ में कांग्रेस की जीत से बढ़ी सियासी हलचल

Abhijeet Vanjari: वंजारी ने सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराया, 2020 के बाद लगातार दूसरी बार हासिल की जीत।

Abhijeet Vanjari: महाराष्ट्र विधान परिषद की नागपुर स्नातक निर्वाचन सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी और पूर्व विधायक सुधाकर कोहले को 3,271 मतों के अंतर से हराया। इस नतीजे के बाद नागपुर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृहक्षेत्र और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की राजनीतिक कर्मभूमि है। शहर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है।

मतगणना के अंतिम नतीजों के अनुसार, वंजारी को कुल 67,231 वोट मिले, जबकि सुधाकर कोहले के पक्ष में 63,960 मत पड़े। मतगणना 27 अक्टूबर को शुरू हुई थी और अंतिम परिणाम 29 अक्टूबर की सुबह घोषित किया गया। प्रक्रिया 40 घंटे से अधिक समय तक चली।

वर्ष 2020 में भी अभिजीत वंजारी ने नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की थी। इस बार दोबारा सीट जीतकर उन्होंने विधान परिषद में अपना प्रतिनिधित्व कायम रखा। भाजपा के लिए यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस सीट पर अपने उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार किया था। <

दूसरे दौर तक भाजपा उम्मीदवार बनाए हुए थे बढ़त

मतगणना के शुरुआती चरणों में भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले आगे चल रहे थे। दूसरे दौर की प्रथम वरीयता वाले मतों की गिनती के बाद कोहले को 60,924 वोट मिले थे, जबकि अभिजीत वंजारी के खाते में 56,630 मत थे। इस समय कोहले 4,294 वोटों से आगे थे।

हालांकि, प्रथम वरीयता के मतों में किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी निर्धारित कोटा नहीं मिल सका। इसके बाद चुनाव की प्रक्रिया के अनुसार दूसरी वरीयता के मतों की गिनती और उम्मीदवारों के बाहर होने के चरण पूरे किए गए। अंतिम गणना में वंजारी ने बढ़त हासिल कर ली और जीत दर्ज की।

यह मुकाबला काफी करीबी रहा। परिणाम ने दिखाया कि वरीयता आधारित मतगणना में शुरुआती बढ़त के बावजूद अंतिम नतीजा बदल सकता है।

राजनीतिक परिवार से आते हैं अभिजीत वंजारी

अभिजीत वंजारी नागपुर के राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता गोविंदराव मारोतराव वंजारी दक्षिण नागपुर से दो बार विधायक रह चुके हैं। पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि के साथ अभिजीत ने छात्र राजनीति के जरिए अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की।

उन्होंने राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और इसके बाद कानून की डिग्री हासिल की। वह नागपुर विश्वविद्यालय की सीनेट और प्रबंधन परिषद में भी सदस्य के रूप में काम कर चुके हैं।

राजनीतिक संगठन के स्तर पर वंजारी कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई की महाराष्ट्र इकाई के महासचिव रहे। इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र प्रदेश युवा कांग्रेस में सचिव की जिम्मेदारी संभाली। वह उत्तर प्रदेश और बिहार में कांग्रेस के चुनाव पर्यवेक्षक के तौर पर भी काम कर चुके हैं।

युवाओं और स्नातकों के बीच काम को बताया जीत की वजह

जीत के बाद मीडिया से बातचीत में अभिजीत वंजारी ने कहा कि पिछले छह वर्षों में उन्होंने स्नातक मतदाता क्षेत्र के लोगों, युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर काम करने की कोशिश की। उनके मुताबिक, इस निर्वाचन क्षेत्र की जरूरतें सामान्य विधानसभा क्षेत्र से अलग हैं, इसलिए यहां के मतदाताओं की समस्याओं को समझना और उनके अनुरूप काम करना जरूरी है।

वंजारी ने कहा कि उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए और मतदाताओं से संपर्क बनाए रखा। उन्होंने अपनी जीत को इसी काम का परिणाम बताया। यह उनके अपने प्रदर्शन और चुनावी सफलता को लेकर दिया गया बयान है।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची में पंजीकृत स्नातक मतदाता विधान परिषद के प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। इसलिए इस क्षेत्र में शैक्षणिक, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दे चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

‘नागपुर अब भाजपा का गढ़ नहीं रहेगा’

जीत के बाद वंजारी ने राजनीतिक संदेश देते हुए कहा कि नागपुर को अब केवल भाजपा का गढ़ नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में कांग्रेस के लिए समर्थन बना हुआ है और उनकी दोबारा जीत इसका संकेत है।

उन्होंने युवाओं के कांग्रेस से जुड़ने की बात भी कही। हालांकि, किसी एक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम पूरे राज्य या देश के युवाओं की राजनीतिक पसंद का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। चुनावी नतीजे को समझने के लिए मतदाताओं की भागीदारी, स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और चुनाव की प्रकृति को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

नागपुर की यह सीट लंबे समय तक भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र के रूप में देखी जाती रही है। नितिन गडकरी भी पहले इस स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के सदस्य रहे थे। ऐसे में कांग्रेस के वंजारी की जीत को स्थानीय राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। <Cite refs={[“turn338349search6″,”turn338349search12”]}/>

राहुल गांधी की भूमिका का भी किया उल्लेख

अभिजीत वंजारी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में छात्रों और युवाओं से संवाद करने की कोशिश की है। वंजारी के अनुसार, राहुल गांधी के कार्यक्रमों में युवाओं की समस्याओं पर चर्चा हुई और उन्हें राजनीतिक प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास किया गया। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के संवाद का लाभ नागपुर के चुनाव में भी मिला।

यह वंजारी का चुनावी नतीजे को लेकर राजनीतिक आकलन है। मतदाताओं ने किन कारणों से मतदान किया, इसे किसी एक बयान के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए निर्वाचन क्षेत्र के मुद्दों, प्रचार अभियान और मतदाताओं के रुझान का विस्तृत विश्लेषण जरूरी होगा।

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में विपक्षी गठबंधन को भी मिली सीटें

नागपुर के अलावा महाराष्ट्र विधान परिषद की अन्य सीटों पर भी मुकाबले हुए। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पांच सीटों के चुनाव में विपक्षी महा विकास आघाड़ी ने तीन सीटें हासिल कीं, जबकि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को दो सीटें मिलीं। भाजपा और शिवसेना ने एक-एक सीट जीती।

नागपुर में कांग्रेस की जीत ने चुनाव के बाद राजनीतिक बयानबाजी को भी तेज किया। इस नतीजे के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए स्थानीय संगठन, उम्मीदवारों की रणनीति और मतदाताओं से संपर्क जैसे मुद्दे चर्चा में हैं।

कुल मिलाकर, अभिजीत वंजारी की लगातार दूसरी जीत कांग्रेस के लिए नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अपना प्रतिनिधित्व बनाए रखने की सफलता है। वहीं, भाजपा के लिए यह परिणाम अपने पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्र में चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा का विषय बन सकता है।

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