Ajit Doval News: ‘आजादी का मतलब मनमानी नहीं, जिम्मेदारी भी’, NSA अजीत डोभाल बोले – युवाओं को सही अर्थ समझना होगा

Ajit Doval News: लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में NSA अजीत डोभाल ने कहा कि आजादी का मतलब मनमानी नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाना है।

Ajit Doval News: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने कहा है कि आजादी का अर्थ केवल अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी करने की स्वतंत्रता नहीं है, बल्कि इसके साथ जिम्मेदारी और राष्ट्रहित का भाव भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि देश की आजादी लंबे संघर्ष और अनगिनत बलिदानों के बाद मिली है।

पुणे में आयोजित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में सम्मानित होने के बाद डोभाल ने कहा कि युवाओं को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना चाहिए और निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर देश के लिए कार्य करना चाहिए।

राष्ट्रहित को सर्वोच्च रखने की अपील

अजीत डोभाल ने कहा कि युवा पीढ़ी को यह संकल्प लेना चाहिए कि वे केवल राष्ट्रहित में कार्य करेंगे। यदि कभी व्यक्तिगत हित और राष्ट्रीय हित के बीच चुनाव की स्थिति आए, तो राष्ट्र को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि इसी सोच के साथ भारत अपने लक्ष्यों को प्राप्त करेगा और इतिहास का नया अध्याय लिखेगा।

अमित शाह ने किया सम्मानित

समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। इस दौरान शाह ने उन्हें पारंपरिक पुणेरी पगड़ी भी पहनाई।

अपने संबोधन में शाह ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए शुरुआती महत्वपूर्ण निर्णयों में अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त करना शामिल था। उन्होंने कहा कि इस फैसले ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को नई दिशा दी तथा वैश्विक स्तर पर देश की रणनीतिक स्थिति को मजबूत किया।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जारी बहस के बीच आया बयान

डोभाल का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी सीमाओं को लेकर सार्वजनिक बहस चल रही है। हालांकि, उन्होंने अपने संबोधन में किसी विशेष घटना का नाम नहीं लिया और आजादी के साथ जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया।

भागवत ने भी दिया था संवाद का संदेश

इससे पहले 25 जुलाई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने नई पीढ़ी के साथ संवाद की आवश्यकता पर बल दिया था। उन्होंने कहा था कि युवाओं को आदेश देने के बजाय उनसे बातचीत कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया जाना चाहिए, क्योंकि संवाद ही सही दिशा दिखाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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