Brazil Election 2026: ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव में लूला की जीत पर बड़ा विवाद, फ्लावियो बोल्सोनारो ने नतीजे ठुकराए और चुनाव रद्द करने की मांग
Brazil Election 2026: 2 घंटे अतिरिक्त वोटिंग के आदेश पर उठा सवाल; फ्लावियो बोल्सोनारो ने लगाया धांधली का आरोप।
Brazil Election 2026: ब्राजील के राष्ट्रपति पद के चुनाव में वामपंथी नेता लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए चौथी बार सत्ता हासिल कर ली है, लेकिन उनकी इस जीत के साथ ही देश की राजनीति में एक नया बवंडर खड़ा हो गया है। लूला के प्रतिद्वंद्वी और दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो ने चुनाव परिणामों को सिरे से खारिज करते हुए पूरे चुनाव को ही रद्द करने की मांग कर दी है।
चुनाव नतीजों को मानने से इनकार
पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो ने चुनाव परिणाम सामने आने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ब्राजील में जो हुआ है, उसे यूं ही स्वीकार नहीं किया जा सकता और इस चुनाव में भारी धांधली हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कांटे की टक्कर में लूला को 51.8 प्रतिशत वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.2 प्रतिशत मत हासिल हुए। दोनों के बीच हार-जीत का अंतर महज 3.6 प्रतिशत का रहा।
वोटिंग का समय बढ़ाने पर मुख्य विवाद
फ्लावियो बोल्सोनारो ने मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश पर आपत्ति जताई है जिसके तहत मतदान केंद्रों को दो घंटे अतिरिक्त खुला रखने की अनुमति दी गई थी। उनका तर्क है कि “खेल के बीच में नियम बदल दिए गए,” जिससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हुई।
हालांकि, यह भी सामने आया है कि मतदान के दौरान परिवहन में देरी और खराब मौसम के चलते वोटिंग प्रभावित होने पर दोनों ही राजनीतिक खेमों (लूला और बोल्सोनारो दोनों) ने मतदान का समय बढ़ाने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद, अचानक देशव्यापी स्तर पर समय बढ़ाए जाने के बाद से ही विवाद गहरा गया है और बोल्सोनारो खेमा लगातार चुनाव रद्द करने की मांग पर अड़ा हुआ है।
इस विवाद के बीच 80 वर्षीय लूला दा सिल्वा ने अपनी इस वापसी को लोकतंत्र की जीत बताया है। विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिणपंथी ताकतों के बढ़ते प्रभाव के बीच लूला की यह जीत लैटिन अमेरिका की राजनीति के लिए एक बड़ा बदलाव है, लेकिन फ्लावियो बोल्सोनारो के रुख और कानूनी आपत्तियों के कारण आने वाले दिनों में ब्राजील का राजनीतिक संकट और गहरा सकता है।



