Election Duty : दिल्ली हाई कोर्ट ने SIR ड्यूटी पर चुनाव आयोग से पूछा- क्या आर्टिकल 324 की आड़ में कुछ भी करेंगे?

Election Duty : दिल्ली हाई कोर्ट ने SIR ड्यूटी में शिक्षकों की तैनाती को लेकर चुनाव आयोग से कड़े सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि क्या आर्टिकल 324 के तहत आयोग मनमाने तरीके से शिक्षकों को चुनावी कार्यों में लगा सकता है। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।

Election Duty : वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के लिए स्कूल शिक्षकों की तैनाती को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से कड़े सवाल किए हैं। अदालत ने पूछा कि क्या संविधान के आर्टिकल 324 के तहत चुनाव आयोग को ऐसी असीमित शक्तियां प्राप्त हैं कि वह शिक्षकों को उनकी छुट्टियों में भी चुनावी कार्यों के लिए तैनात कर दे।

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल मानदेय या मुआवजा देने से शिक्षकों की छुट्टियों और आराम के अधिकार की अनदेखी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने पूछा कि क्या आयोग यह कह सकता है कि मुआवजा दिया जा रहा है, इसलिए सभी को चुनावी ड्यूटी करनी ही होगी।

शिक्षकों की तैनाती पर कोर्ट ने जताई चिंता

हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी पूछा कि वह किस कानूनी अधिकार के तहत स्कूल शिक्षकों को SIR ड्यूटी के लिए बाध्य कर रहा है। अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि यदि कोई शिक्षक ड्यूटी करने से इनकार करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का अधिकार आयोग के पास कैसे है।

कोर्ट ने कहा कि यदि चुनाव आयोग वास्तव में इस ड्यूटी को स्वैच्छिक (Voluntary) घोषित कर देता है और शिक्षकों पर कोई दबाव नहीं होगा, तो याचिका का समाधान संभव हो सकता है।

चुनाव आयोग ने कोर्ट में क्या कहा?

चुनाव आयोग की ओर से पेश अधिवक्ता संजय वशिष्ठ ने दलील दी कि दिल्ली में SIR की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और इस कार्य के लिए केवल 10 से 14 प्रतिशत स्कूल शिक्षकों की सेवाएं ली गई हैं।

उन्होंने कहा कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट की धारा 13B(2) चुनाव आयोग को कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार देती है। आयोग का कहना है कि शिक्षकों को केवल छुट्टियों या गैर-शिक्षण समय में ही चुनावी कार्य सौंपा जाता है।

छुट्टियों में ड्यूटी पर कोर्ट का सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि यदि अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह शिक्षकों को भी अवकाश का अधिकार है, तो उन्हें छुट्टियों के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में काम करने के लिए क्यों कहा जा रहा है।

हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस पूरे मामले पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।

जनहित याचिका में दी गई है चुनौती

यह मामला अधिवक्ताओं राजेश कुमार गोगना और अशोक अग्रवाल द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में चुनाव आयोग द्वारा शिक्षकों की चुनावी कार्यों में तैनाती के निर्णय को चुनौती दी गई है।

क्या है संविधान का आर्टिकल 324?

भारतीय संविधान का आर्टिकल 324 भारत निर्वाचन आयोग को संसद, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के संचालन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी देता है। इसका उद्देश्य देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। हालांकि, वर्तमान मामले में अदालत यह परख रही है कि इन शक्तियों की सीमा क्या है और क्या इनके आधार पर शिक्षकों को अनिवार्य रूप से चुनावी कार्यों में लगाया जा सकता है।

Related Articles

Back to top button