gold price news: सोना-चांदी खरीदने वालों पर बढ़ सकता है बोझ! GST काउंसिल की बैठक में होगा बड़ा फैसला
gold price news: बैंकों और नामित एजेंसियों को मिलने वाली IGST छूट खत्म करने के प्रस्ताव पर विचार, कीमतों और आयात व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
gold price news: भारत में सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए जल्द ही एक अहम बदलाव देखने को मिल सकता है। 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में कीमती धातुओं के आयात से जुड़े नियमों की समीक्षा की जाएगी। चर्चा उस प्रस्ताव पर होने वाली है जिसमें बैंकों और सरकार द्वारा अधिकृत एजेंसियों को मिलने वाली IGST छूट समाप्त करने की बात कही गई है।
यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो सोना, चांदी और प्लैटिनम आयात करने वाली इन संस्थाओं को भी अन्य आयातकों की तरह 3 प्रतिशत IGST का भुगतान करना पड़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा और तत्काल प्रभाव खुदरा बाजार में दिखाई देना जरूरी नहीं है, लेकिन आयात लागत बढ़ने से कीमतों पर दबाव बन सकता है।
मौजूदा व्यवस्था क्या है?
वर्तमान में कीमती धातुओं के आयात पर 3 प्रतिशत IGST लागू है। हालांकि कुछ चुनिंदा बैंक और सरकार द्वारा नामित एजेंसियां इस कर से छूट प्राप्त करती हैं। यह व्यवस्था GST लागू होने के शुरुआती दौर में बनाई गई थी ताकि आयात और वितरण प्रणाली को आसान बनाया जा सके।
अब सरकार इस छूट की उपयोगिता की समीक्षा कर रही है। माना जा रहा है कि सभी आयातकों के लिए एक समान टैक्स ढांचा लागू करने की दिशा में यह कदम उठाया जा सकता है।
सरकार के सामने क्या चुनौती है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है और घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा होता है। ऐसे में भारी मात्रा में होने वाला आयात विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर डालता है।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच देश का सोना आयात बढ़कर 17.47 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं चांदी का आयात भले कुछ कम हुआ हो, लेकिन कुल मिलाकर कीमती धातुओं पर निर्भरता बनी हुई है। सरकार आयात पर बेहतर निगरानी और कर व्यवस्था में समानता लाने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
क्या बढ़ जाएंगे सोने-चांदी के दाम?
IGST छूट खत्म होने से आयातकों की लागत बढ़ सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में सोना और चांदी तुरंत 3 प्रतिशत महंगे हो जाएंगे। कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, निवेश मांग और घरेलू खपत शामिल हैं।
फिर भी, यदि आयात लागत लगातार बढ़ती है तो आने वाले समय में इसका असर उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
पहले भी सरकार बढ़ा चुकी है शुल्क
कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करने के लिए सरकार पहले भी कई कदम उठा चुकी है। मई 2026 में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया गया था। इसी तरह प्लैटिनम पर भी शुल्क में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई थी।
अब सभी की निगाहें 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक पर हैं, जहां लिया गया फैसला देश के बुलियन बाजार, आयात कारोबार और सोना-चांदी खरीदने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं पर असर डाल सकता है।



