GST: GST में गिरफ्तारी के अधिकार पर सरकार का बड़ा मंथन, 7 अक्टूबर को हो सकता है फैसला
GST: टैक्स अधिकारियों की शक्तियों में बदलाव पर विचार, गंभीर धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की तैयारी; 2021-22 से 2024-25 के बीच 887 गिरफ्तारियां हुईं
GST: वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था में एक और अहम बदलाव की तैयारी हो सकती है। सरकार GST अधिकारियों को मिली गिरफ्तारी की शक्ति को सीमित करने या समाप्त करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस मुद्दे पर 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, अभी इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो GST कानून में जरूरी संशोधन करना होगा। इसके बाद सरकार इस बदलाव को संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश कर सकती है। यानी फिलहाल कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए नियमों में कोई तत्काल बदलाव नहीं हुआ है।
क्यों उठी गिरफ्तारी की शक्ति बदलने की जरूरत?
GST व्यवस्था में टैक्स चोरी और गंभीर वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए अधिकारियों को कुछ परिस्थितियों में गिरफ्तारी का अधिकार दिया गया है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कारोबारी संगठनों और उद्योग जगत की ओर से इस शक्ति के इस्तेमाल को लेकर चिंताएं भी सामने आती रही हैं।
सरकार के स्तर पर कथित तौर पर इस बात पर चर्चा चल रही है कि टैक्स चोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई बनी रहे, लेकिन गिरफ्तारी जैसी कठोर कार्रवाई का इस्तेमाल केवल उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत हो।
अभी GST अधिकारियों के पास क्या अधिकार हैं?
मौजूदा व्यवस्था के तहत गंभीर GST अपराधों के मामलों में गिरफ्तारी का प्रावधान मौजूद है। इनमें फर्जी चालान जारी करना, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना और जानबूझकर टैक्स चोरी जैसे मामले शामिल हो सकते हैं।
CGST Act की धारा 69 के तहत निर्धारित परिस्थितियों में कमिश्नर किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी को अधिकृत कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित अधिकारी के पास यह मानने का आधार होना जरूरी है कि व्यक्ति ने कानून के तहत गंभीर अपराध किया है।
सरकार ने गिरफ्तारी से जुड़े अधिकारियों के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल कानून में गिरफ्तारी का प्रावधान होने के आधार पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार न किया जाए।
चार साल में 887 लोगों की गिरफ्तारी
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2021-22 से 2024-25 के बीच केंद्रीय GST अधिकारियों के सामने 72,393 अपराध के मामले आए। इस अवधि में केंद्रीय GST फॉर्मेशन ने 887 लोगों को गिरफ्तार किया। इसमें राज्य GST अधिकारियों द्वारा की गई गिरफ्तारियां शामिल नहीं हैं।
इन आंकड़ों ने GST जांच में गिरफ्तारी की शक्ति के इस्तेमाल को लेकर जारी बहस को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
कारोबारियों को क्या है चिंता?
GST जांच के दौरान कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों और कारोबारियों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई को लेकर उद्योग जगत की ओर से समय-समय पर चिंता जताई जाती रही है।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि टैक्स चोरी और संगठित धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कमजोर न पड़े, लेकिन ईमानदार कारोबारियों को जांच प्रक्रिया के दौरान अनावश्यक दबाव का सामना भी न करना पड़े।
इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए गिरफ्तारी की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव पर विचार किया जा रहा है।
गंभीर फ्रॉड पर कार्रवाई रहेगी जारी
प्रस्तावित बदलाव का मतलब यह नहीं है कि GST से जुड़े गंभीर अपराधों में कार्रवाई बंद हो जाएगी। रिपोर्टों के मुताबिक, जानबूझकर की गई बड़ी धोखाधड़ी और गंभीर वित्तीय अपराधों के खिलाफ आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई का विकल्प मौजूद रखा जा सकता है।
यानी बदलाव मुख्य रूप से इस बात को लेकर हो सकता है कि GST अधिकारी खुद गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल किस तरह करें या यह अधिकार उनके पास रहे भी या नहीं।
7 अक्टूबर की बैठक पर टिकी नजर
GST काउंसिल की 57वीं बैठक 7 अक्टूबर 2026 को होने की संभावना है। बैठक में GST से जुड़े कई प्रक्रिया सुधारों पर चर्चा होनी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी बैठक में प्रक्रिया सुधारों, ई-इनवॉइसिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसे मुद्दों पर चर्चा की जानकारी दी है।
इसी बैठक में GST अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों पर प्रस्ताव सामने आता है या नहीं, इस पर अब नजर रहेगी।
बदलाव हुआ तो संसद से गुजरना होगा कानून
अगर GST काउंसिल इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाती है तो केवल बैठक में चर्चा से नियम नहीं बदल जाएंगे। इसके लिए संबंधित GST कानून में संशोधन करना होगा।
सरकार को संशोधन विधेयक संसद में लाना पड़ सकता है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने और जरूरी विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नई व्यवस्था लागू हो सकेगी।
फिलहाल लागू हैं मौजूदा नियम
अभी GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की मौजूदा शक्ति खत्म नहीं हुई है। इसलिए टैक्स चोरी या गंभीर GST अपराध के मामलों में वर्तमान कानूनी प्रावधान ही लागू हैं।
7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकार इस व्यवस्था में वास्तव में क्या बदलाव करना चाहती है और प्रस्ताव किस रूप में आगे बढ़ता है।



