Insurance Policy: बीमा सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, एजेंट कमीशन से लेकर खर्चों पर IRDAI की नजर
Insurance Policy: लोन के साथ बीमा बेचने, मिस-सेलिंग और खर्चों को नियंत्रित करने के लिए IRDAI ने नए नियमों का मसौदा पेश किया।
Insurance Policy: बीमा पॉलिसी खरीदने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा कंपनियों के खर्च, एजेंटों के कमीशन, पॉलिसी वितरण व्यवस्था और मिस-सेलिंग से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए नए प्रस्ताव जारी किए हैं। इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य बीमा क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और ग्राहक हितैषी बनाना है।
बीमा क्षेत्र में लंबे समय से ऊंचे खर्च, जटिल कमीशन व्यवस्था और गलत तरीके से पॉलिसी बेचने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में IRDAI का मानना है कि नए नियम लागू होने से ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और उन्हें बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।
खर्चों पर सख्ती की तैयारी
IRDAI ने लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए खर्च प्रबंधन (EoM) की सीमा कम करने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कंपनियों को चरणबद्ध तरीके से अपने परिचालन और वितरण खर्च को निर्धारित सीमा के भीतर लाना होगा। वहीं, जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए भी खर्चों की गणना के तरीके में बदलाव का सुझाव दिया गया है। नियामक का मानना है कि इससे अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगेगी और कंपनियां अधिक दक्षता के साथ काम कर सकेंगी।
कमीशन ढांचे में हो सकता है बड़ा बदलाव
नए प्रस्तावों के अनुसार सभी बीमा उत्पादों पर एक जैसा कमीशन लागू करने के बजाय पॉलिसी की प्रकृति, अवधि, जोखिम और बिक्री प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए कमीशन तय किया जा सकता है। यानी अलग-अलग उत्पादों के लिए अलग कमीशन संरचना लागू हो सकती है। इससे कमीशन व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनने की उम्मीद है और ग्राहकों को यह समझने में आसानी होगी कि उनकी पॉलिसी पर कितना भुगतान किया जा रहा है।
हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस भी दायरे में
IRDAI ने हेल्थ इंश्योरेंस और मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस से जुड़े कमीशन नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है। खासकर मोटर थर्ड-पार्टी बीमा में डिस्ट्रीब्यूटर्स के कमीशन को सीमित करने की बात कही गई है। वहीं हेल्थ इंश्योरेंस में नई पॉलिसी और उसके रिन्यूअल पर अलग-अलग कमीशन ढांचे का सुझाव दिया गया है।
लोन के साथ जबरन बीमा बेचने पर लग सकती है रोक
कई बार ग्राहक शिकायत करते हैं कि लोन लेते समय उन्हें बीमा पॉलिसी भी खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। IRDAI ने ऐसी व्यवस्था पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा बैंक और NBFC कर्मचारियों को केवल बिक्री लक्ष्य पूरा करने के लिए दिए जाने वाले प्रोत्साहनों और रिवॉर्ड आधारित सिस्टम पर भी नियंत्रण की बात कही गई है। इससे ग्राहकों को अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार बीमा चुनने की अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है।
कमीशन और नीतियों की जानकारी करनी होगी सार्वजनिक
नियामक ने सुझाव दिया है कि बीमा कंपनियां और बड़े डिस्ट्रीब्यूटर्स अपनी कमीशन नीतियों और भुगतान संरचना की जानकारी सरल और स्पष्ट भाषा में सार्वजनिक करें। इससे ग्राहकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि पॉलिसी की बिक्री में कौन-कौन शामिल है और उन्हें कितना भुगतान किया जा रहा है।
मिस-सेलिंग पर बढ़ेगी जवाबदेही
बीमा क्षेत्र में गलत जानकारी देकर पॉलिसी बेचने की शिकायतों को रोकने के लिए IRDAI ने सख्त कदम सुझाए हैं। प्रस्ताव के अनुसार पॉलिसी बेचने वाले व्यक्ति की पहचान संबंधित पॉलिसी से जोड़ी जाएगी। इसके अलावा यदि किसी मामले में मिस-सेलिंग साबित होती है तो संबंधित एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर से कमीशन वापस लेने का प्रावधान भी लागू किया जा सकता है। साथ ही ऐसी शिकायतों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने पर भी विचार किया गया है।
ग्राहकों को क्या होगा फायदा?
यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो बीमा खरीदने वाले ग्राहकों को अधिक पारदर्शी प्रक्रिया, बेहतर जानकारी और गलत बिक्री से सुरक्षा मिल सकती है। वहीं कंपनियों के अनावश्यक खर्च कम होने और जवाबदेही बढ़ने से पूरे बीमा क्षेत्र में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल ये प्रस्ताव विचाराधीन हैं और अंतिम नियम बनने से पहले इन पर संबंधित पक्षों की राय ली जाएगी।


