JPSC-JSSC Protest: छात्रों के आंदोलन पर बन सकती है सहमति, CM हेमंत सोरेन ने भेजा वार्ता का संदेश
13 दिनों से जारी आंदोलन के बीच सरकार ने बातचीत की पहल की, छात्रों ने मीडिया की मौजूदगी में खुले मंच पर मुख्यमंत्री से सीधे संवाद की रखी मांग।
JPSC-JSSC Protest: झारखंड में JPSC और JSSC समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में पिछले 13 दिनों से जारी छात्र आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से आंदोलनकारी छात्रों को बातचीत का संदेश भेजे जाने के बाद सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध खत्म होने की उम्मीद जगी है। हालांकि, छात्रों ने साफ कर दिया है कि वे किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि मीडिया की मौजूदगी में खुले मंच पर मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत करना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री का संदेश लेकर आंदोलन स्थल पहुंचे अधिकारी
बुधवार को रांची के आंदोलन स्थल पर एसडीएम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का संदेश लेकर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों को सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव दिया और प्रतिनिधिमंडल बनाकर बातचीत करने का आग्रह किया। सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि दोनों पक्षों के बीच जल्द बैठक हो सकती है, हालांकि बैठक का समय और स्थान अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
छात्रों ने रखीं ये प्रमुख शर्तें
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि बातचीत पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। इसलिए मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक मीडिया और कैमरों की मौजूदगी में खुले मंच पर आयोजित की जाए। छात्रों का यह भी कहना है कि वार्ता सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से ही होगी, किसी बंद कमरे में नहीं।
छात्रों ने अपना प्रतिनिधिमंडल भी तैयार कर लिया है, जो सरकार के सामने उनकी मांगों को रखेगा।
‘मांगें पूरी होंगी तभी खत्म होगा आंदोलन’
छात्र नेताओं पीयूष कुमार और रवींद्र पासवान ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह छात्रों के हितों और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेती है, तभी आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा। उनका कहना है कि यह किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की लड़ाई है।
सरकार से पूछा- पहले बातचीत क्यों नहीं की?
छात्रों ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वे लगातार 13 दिनों से आंदोलन कर रहे थे, तब बातचीत की पहल पहले क्यों नहीं की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन को कमजोर दिखाने के लिए अनशन टूटने जैसी अफवाहें फैलाई गईं। छात्रों के अनुसार, सामूहिक अनशन अब भी जारी है और आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा।
सरकार का क्या कहना है?
झारखंड सरकार के मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मामला केवल पेपर लीक का नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और बैकडोर नियुक्तियों का है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और योग्य अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन
इस बीच छात्र आंदोलन को कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन भी मिलने लगा है। जानकारी के मुताबिक, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि रांची पहुंचकर आंदोलन में शामिल हो सकते हैं। विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है।
आगे क्या?
अब सबकी नजर सरकार और छात्रों के बीच प्रस्तावित वार्ता पर टिकी है। यदि दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंचते हैं तो 13 दिनों से जारी आंदोलन समाप्त हो सकता है। वहीं, यदि बातचीत बेनतीजा रहती है तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। आने वाले घंटे झारखंड की भर्ती प्रक्रिया और हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।



