National News: महाराष्ट्र में फिर सियासी भूचाल! उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका? 6-7 सांसद शिंदे गुट में जा सकते हैं शामिल
दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल के बीच शिवसेना (UBT) के कई सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने की अटकलें तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, पहले श्रीकांत शिंदे के आवास पर बैठक और फिर लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की तैयारी है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े उलटफेर की चर्चा शुरू हो गई है।
National News: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े घटनाक्रम की ओर बढ़ती नजर आ रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) यानी UBT के कई सांसदों के पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की चर्चाओं ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। सूत्रों के अनुसार, उद्धव गुट के 6 से 7 सांसद नई दिल्ली पहुंचे हैं और दिनभर होने वाली बैठकों के बाद बड़ा फैसला सामने आ सकता है।
जानकारी के मुताबिक, इन सांसदों की पहले श्रीकांत शिंदे के दिल्ली स्थित आवास पर बैठक होने की संभावना है। बैठक में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के भी शामिल होने की चर्चा है। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संभावित मुलाकात को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि यदि सांसद संख्या के लिहाज से आवश्यक समर्थन जुटा लेते हैं, तो वे पहले अलग संसदीय समूह बनाने की प्रक्रिया अपना सकते हैं और फिर आगे की रणनीति तय कर सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एकनाथ शिंदे का दिल्ली पहुंचना भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। खबर है कि उनकी कानूनी टीम भी राजधानी में मौजूद है ताकि किसी भी संभावित संवैधानिक प्रक्रिया को नियमों के तहत पूरा किया जा सके। इससे साफ संकेत मिलता है कि शिंदे खेमा हर स्थिति के लिए तैयारी कर चुका है।
दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के लिए यह घटनाक्रम चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। हाल ही में मातोश्री में बुलाई गई आपात बैठक में सभी सांसदों की मौजूदगी नहीं रही, जिसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित बगावत की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। हालांकि शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं का कहना है कि पार्टी एकजुट है और टूट की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वास्तव में बड़ी संख्या में सांसद शिंदे गुट का रुख करते हैं, तो यह 2022 में हुई उस ऐतिहासिक बगावत की याद दिलाएगा, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक अलग हो गए थे और महाराष्ट्र की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल गया था। बाद में शिंदे गुट को आधिकारिक शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न भी मिला।
फिलहाल सभी निगाहें दिल्ली में हो रही बैठकों और संभावित राजनीतिक फैसलों पर टिकी हैं। हालांकि अभी तक किसी भी सांसद ने आधिकारिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये चर्चाएं वास्तविक राजनीतिक बदलाव में बदलती हैं या फिर उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को एकजुट रखने में सफल रहते हैं।
आने वाले कुछ घंटे महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं और इनका असर राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
Written By: Ekta Verma



