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Bhojshala Verdict : भोजशाला विवाद पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, परिसर को माना देवी वाग्देवी का मंदिर

Bhojshala Verdict : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी वाग्देवी का हिंदू मंदिर माना है। कोर्ट ने फैसले में अयोध्या केस के सिद्धांतों का हवाला देते हुए ASI के 2003 आदेश को रद्द कर दिया।

Bhojshala Verdict : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए परिसर को देवी वाग्देवी (सरस्वती) का हिंदू मंदिर माना है। कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या विवाद फैसला 2019 के सिद्धांतों का हवाला देते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के आदेश को रद्द कर दिया।

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कहा कि ऐतिहासिक साहित्य, स्थापत्य साक्ष्य और ASI की रिपोर्टों से यह स्पष्ट होता है कि भोजशाला मूल रूप से देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र था, जिसका संबंध परमार वंश के राजा भोज से रहा है।

कोर्ट ने माना कि इस स्थल पर हिंदू पूजा-पाठ की परंपरा पूरी तरह कभी समाप्त नहीं हुई। वहीं, मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने राज्य सरकार से धार जिले में मस्जिद निर्माण के लिए वैकल्पिक भूमि देने पर विचार करने को कहा है।

यह विवाद ASI के 2003 के उस आदेश से जुड़ा था, जिसमें मुसलमानों को शुक्रवार की नमाज और हिंदुओं को बसंत पंचमी व मंगलवार को पूजा की अनुमति दी गई थी। हिंदू पक्ष ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी थी।

फैसले में अदालत ने ‘पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991’ के तहत उठाई गई आपत्तियों को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि भोजशाला 1904 से संरक्षित स्मारक है, इसलिए यह मामला उस कानून के दायरे से बाहर है।

सुनवाई के दौरान जैन पक्ष ने भी दावा किया था कि यहां मिली प्रतिमा जैन देवी अंबिका की है, लेकिन अदालत ने कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि विवादित स्थल कभी जैन मंदिर था।

अदालत ने ASI को परिसर का प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखने का निर्देश दिया है। इस फैसले को अयोध्या विवाद के बाद देश के सबसे अहम धार्मिक-ऐतिहासिक मामलों में से एक माना जा रहा है।

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