Bangladesh Violence की पूरी सच्चाई… कब, क्यों, कैसे भड़की हिंसा ?

Bangladesh Violence: दरअसल बांग्लादेश एक ही दिन में नहीं धधक गया…सालों से धुंआ उठ रहा था … रह-रह के चिंगारी… जलने को बेताब थी…बांग्लादेश में सरकारी नौकरी में आरक्षण के खिलाफ बगावत…जुलाई के आखिर में… सरकार विरोधी उग्र वायलेंस में…बदल गई … हालात ये हो गए कि शेख हसीना को सिर्फ…इस्‍तीफा ही नहीं देना पड़ा…बल्कि सरपट देश छोड़कर भी…भागना पड़ गया…ऐसे में सवाल उठता हैं कि…बांग्‍लादेश में हालात बेकाबू कैसे हो गए…तख्तापलट के लिए जो जिम्मेदार हैं…नाम हैं…नाहिद इस्लाम…

माथे पर बांग्लादेशी झंडा बांधे नाहिद इस्लाम ढाका यूनिवर्सि‍टी में समाजशास्त्र के छात्र हैं…नाह‍िद मीठा बोलते हैं… मगर उनकी लीडरशिप क्वालिटी उन्हें बाकियों से जुदा करती हैं… यहीं वजह हैं कि लगातार 15 साल से सत्ता पर काबिज प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा… सरकारी नौकरी में आरक्षण के खिलाफ 26 साल के नाहिद इस्लाम के…’हसीना को हटाओ’ मुवमेंट ने हसीना को हटा कर ही दम लिया..

साल 2018…हसीना सरकार ने अलग-अलग समुदाय को मिलने वाला…56 फीसदी आरक्षण खत्म कर दिया…लेकिन इसी साल जून में ढाका हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट कर बहाल कर दिया …इसके बाद  56 फीसदी आरक्षण फिर से बरकरार हो गया… जिसे लेकर प्रोटेस्ट शुरू हो गए …नाहिद इस्लाम ही वो शख्स हैं… जिसकी अगुवाई में प्रोटेस्ट तब तक चले…जब तक प्रोटेस्ट ने…शेख हसीना की नाक में दम नहीं कर लिया…प्रोटेस्ट से निपटने के लिए… हसीना सरकार ने भी..हिंसा का रास्ता अख्तियार किया….ऑफिसियल आंकड़ा हैं कि…प्रोटेस्ट में शामिल 150 लोगों की मौत हो गई..

मामला सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंचा…जहां सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया… आरक्षण की सीमा  56फीसदी  घटाकर 7फीसदी  कर दी…इसके बाद आरक्षण के खिलाफ प्रोटेस्ट धीरे-धीरे समाप्त हो ही रहा था…कि इसी बीच डिटेक्टिव ब्रांच के अफसरान या यूं कहे कि…सिस्टम की नज़र…आरक्षण विरोधी प्रदर्शन को लीड करने वाले नाहिद इस्लाम पर पड़ी…नाहिद समेत 6 लोगों को कस्टडी में ले कर जो ज़्यादतियां उन पर टूटी… उसका खामियाजा… आज शेख हसीना उठा रही हैं…

…उस वक्त नाहिद…उनके साथ आसिफ महमूद…और अबू बकर मजूमदार घायल थे…और हॉस्पिटल में इलाज करा रहे थे…

नाहिद का दावा हैं कि…. 19 जुलाई को पुलिस ने उन्‍हें और उनके दो साथियो जिनमे शामिल हैं…आसिफ महमूद और अबू बकर मजूमदार…को अस्‍पताल से उठाया..पीटा और आंदोलन वापस लेने के लिए जबरदस्ती वीडियो बनवाया…

नाहिद का ये भी दावा हैं कि पुलिस ने उन्‍हें तब तक पीटा, जब तक वह बेहोश न हो गए…नाहिद इस्लाम को गायब होने के 24 घंटे बाद एक पुल के नीचे बेहोशी की हालत में पाया गया था…हालांकि, पुलिस ने वही किया जो करती आई हैं..इन सभी आरोपों से इनकार..

जब नाहिद इस्लाम और उनके दोनों साथी….आसिफ महमूद और अबू बकर मजूमदार पुलिस…हिरासत से बाहर आए तो पूरी घटना खुलकर सामने आ गई…इस खुलासे के बाद से प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और फूट पड़ा…

जिसके बाद देश की कमान सेना ने अपने हाथों में ले ली…

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बाद के घटनाक्रम में…नाहिद इस्लाम….आसिफ महमूद…और अबू बकर मजूमदार ने ही… वीडियो जारी कर एलान किया कि अंतरिम सरकार में प्रधानमंत्री नोबेल विजेता अर्थशास्त्री डॉ. मोहम्मद यूनुस होंगे…

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