Election Commission: पीयूष गोयल ने राहुल गांधी को पुराने फैसले याद दिलाए, टीएन शेषन से लेकर एमएस गिल तक का किया जिक्र
Election Commission: चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कांग्रेस के सवालों के बीच केंद्रीय मंत्री ने पुराने उदाहरण गिनाए, राहुल गांधी और INDIA गठबंधन की रणनीति पर भी साधा निशाना
Election Commission: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस के पुराने राजनीतिक फैसलों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पार्टी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते समय अपने इतिहास को नजरअंदाज करती है।
गोयल ने अपने बयान में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन और एमएस गिल का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने अलग-अलग समय पर चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों को राजनीतिक पद और जिम्मेदारियां दीं। उनके मुताबिक, इन उदाहरणों को भी चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर चल रही बहस में ध्यान में रखना चाहिए।
टीएन शेषन को कांग्रेस का टिकट देने का उठाया मुद्दा
पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस उनके काम और ईमानदारी की प्रशंसा करती थी, लेकिन बाद में उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर दिया गया।
गोयल के अनुसार, 1999 में शेषन ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी पूर्व चुनाव आयुक्त को राजनीतिक दल से टिकट देना उनके काम को पुरस्कृत करने जैसा नहीं था।
यह टिप्पणी गोयल ने कांग्रेस के मौजूदा रुख पर सवाल उठाने के लिए की। हालांकि, किसी पूर्व अधिकारी का बाद में चुनाव लड़ना अपने आप में चुनाव आयोग के कार्यकाल के दौरान पक्षपात का प्रमाण नहीं है।
एमएस गिल को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना
केंद्रीय मंत्री ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का भी जिक्र किया। गिल 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे। गोयल ने उनके कार्यकाल के बाद मिले सम्मान और राजनीतिक नियुक्तियों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में गिल को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। इसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हुए और 2004 में राज्यसभा पहुंचे। बाद में 2008 में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली।
गोयल ने इन घटनाओं को आधार बनाकर आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग से जुड़े पदों और अधिकारियों के मामले में राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की। ये आरोप केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
टीकाराम मीणा और रतन यू केलकर का भी किया उल्लेख
पीयूष गोयल ने अपने बयान में अन्य अधिकारियों के उदाहरण भी दिए। उन्होंने टीकाराम मीणा का जिक्र करते हुए कहा कि केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पद पर रहने के बाद उन्हें राजस्थान में कांग्रेस की चुनावी घोषणापत्र टीम से जोड़ा गया था।
उन्होंने केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर का भी उल्लेख किया। गोयल के अनुसार, मई 2026 में केरल में चुनाव के बाद मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने केलकर को अपना मुख्य सचिव नियुक्त करने की घोषणा की।
गोयल ने इन घटनाओं को चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियों और राजनीतिक भूमिकाओं को लेकर सवाल उठाने के लिए पेश किया। इन उदाहरणों के आधार पर लगाए गए पक्षपात के आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
राहुल गांधी की बैठक से पहले आया बयान
पीयूष गोयल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई, जब INDIA गठबंधन के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं को चाय पर बातचीत के लिए बुलाया था।
विपक्षी दल चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की ओर से संयुक्त रणनीति बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा विपक्ष का विरोध
सोमवार को INDIA गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली में बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज कराने और SIR से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही।
रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी नेताओं ने इस मामले में याचिका भी दाखिल की है, जिस पर आगे सुनवाई हो सकती है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर राजनीतिक बहस तेज
चुनाव आयोग की भूमिका और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सत्तापक्ष तथा विपक्ष के बीच बयानबाजी जारी है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेता आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा नेता विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस के पुराने फैसलों और राजनीतिक इतिहास का हवाला दे रहे हैं।
पीयूष गोयल के ताजा बयान में भी यही राजनीतिक टकराव दिखाई दिया। अब इस मुद्दे पर आगे की चर्चा विपक्ष की बैठकों, चुनाव आयोग से जुड़े घटनाक्रम और दाखिल याचिका पर होने वाली कानूनी प्रक्रिया के इर्द-गिर्द केंद्रित रह सकती है।



