Stock Market Crash: शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 1200 अंक से ज्यादा टूटा; निवेशकों की दौलत में 10.5 लाख करोड़ की कमी

Stock Market Crash: रेपो रेट बढ़ने के बाद बढ़ा बिकवाली का दबाव, महंगा कच्चा तेल, कमजोर रुपया और विदेशी निवेशकों की निकासी ने बाजार की चिंता बढ़ाई

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। सप्ताह के दौरान पहले से दबाव झेल रहे घरेलू बाजार में गुरुवार को गिरावट और तेज हो गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में एक ही दिन में करीब 10.52 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई।

बाजार में यह दबाव ऐसे समय बढ़ा है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, रुपये पर दबाव है और विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। इसके अलावा RBI की ओर से रेपो रेट में बढ़ोतरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।

सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट

गुरुवार के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 1,231.91 अंक यानी 1.69 फीसदी टूटकर 71,406.79 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 में करीब 413 अंक यानी 1.82 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 22,190 के स्तर तक फिसल गया।

रॉयटर्स के मुताबिक, कारोबार के दौरान सेंसेक्स 32 महीने के निचले स्तर तक भी पहुंचा। निफ्टी में भी करीब 1.64 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। बाजार के सभी 16 प्रमुख सेक्टरों में दबाव देखने को मिला, जबकि स्मॉलकैप और मिडकैप सूचकांक भी 2 फीसदी से ज्यादा नीचे आए।

निवेशकों की संपत्ति में 10.52 लाख करोड़ की कमी

शेयर बाजार में तेज बिकवाली का सीधा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बुधवार को बाजार बंद होने के समय करीब 4,72,35,273 करोड़ रुपये था।

गुरुवार के कारोबार में गिरावट के बाद यह घटकर करीब 4,61,83,659 करोड़ रुपये रह गया। यानी बाजार पूंजीकरण में लगभग 10,51,614 करोड़ रुपये, यानी 10.52 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।

यह आंकड़ा निवेशकों की कुल संपत्ति में बाजार मूल्य के आधार पर हुई कमी को दर्शाता है।

RBI के रेपो रेट फैसले का भी असर

बाजार में गिरावट के बीच RBI का हालिया फैसला भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहा। भारतीय रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया। करीब चार साल में यह पहली बड़ी दर वृद्धि है।

RBI ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। इसका संकेत है कि फिलहाल ब्याज दरों में तत्काल कटौती की संभावना कम है और आगे के फैसले महंगाई तथा आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे।

महंगा कच्चा तेल बना बड़ी चिंता

शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमत भी शामिल है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है और गुरुवार को यह 104 डॉलर से ज्यादा के स्तर तक पहुंचा।

भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल, महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से निवेशक तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

कमजोर रुपये ने बढ़ाई बाजार की चिंता

डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की मुश्किलें बढ़ाई हैं। महंगे कच्चे तेल और वैश्विक अनिश्चितता के बीच रुपये पर दबाव बना हुआ है।

कमजोर रुपया आयात लागत को प्रभावित करता है और इससे महंगाई की चिंता बढ़ सकती है। यही वजह है कि निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में RBI की मौद्रिक नीति और रुपये की चाल दोनों अहम रहने वाली हैं।

विदेशी निवेशक लगातार निकाल रहे पैसा

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी भी बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। रॉयटर्स के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने लगातार नौ दिनों में करीब 4.86 अरब डॉलर की बिकवाली की है। 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की निकासी लगभग 30.4 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।

विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ता है और रुपये पर भी असर पड़ सकता है।

पूरे हफ्ते दबाव में रहा बाजार

गुरुवार की गिरावट अचानक नहीं आई। इससे पहले भी सप्ताह के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ था। वैश्विक संकेतों, ब्याज दरों, कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों को लेकर निवेशकों में सतर्कता देखी जा रही थी।

गुरुवार को इन सभी चिंताओं का असर एक साथ दिखाई दिया और बाजार में बिकवाली तेज हो गई।

आगे किन संकेतों पर रहेगी नजर?

अब निवेशकों की निगाहें कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और RBI के आगे के रुख पर रहेंगी। इसके साथ ही कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

RBI ने FY27 के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1 फीसदी किया है, लेकिन साथ ही महंगाई के दबाव को देखते हुए मौद्रिक नीति में सख्ती का संकेत दिया है। ऐसे में आने वाले सत्रों में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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