Subsidy Bill 2026: LPG, फूड और फर्टिलाइजर सब्सिडी से बढ़ा सरकारी खर्च, वित्तीय संतुलन पर बढ़ा दबाव

एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में एलपीजी सब्सिडी का खर्च 1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जा सकता है, जबकि खाद्य और उर्वरक सब्सिडी में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

Subsidy Bill 2026: केंद्र सरकार के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में सब्सिडी का बढ़ता खर्च बड़ी आर्थिक चुनौती बनता नजर आ रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, एलपीजी, खाद्य और उर्वरक (फर्टिलाइजर) सब्सिडी पर तेजी से बढ़ रहे खर्च का असर सरकारी वित्त और बजट प्रबंधन पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यदि मौजूदा स्थिति बनी रही तो अकेले एलपीजी सब्सिडी का खर्च इस वित्त वर्ष में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है।

एलपीजी सब्सिडी बजट से काफी आगे

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में एलपीजी सब्सिडी के लिए करीब 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। हालांकि, मौजूदा खर्च इस सीमा से आगे निकल चुका है। अनुमान है कि फिलहाल प्रति एलपीजी सिलेंडर पर सरकार को लगभग 490 रुपये का सब्सिडी बोझ उठाना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ डालने के बजाय उसका बड़ा हिस्सा स्वयं वहन कर रही हैं।

फूड और फर्टिलाइजर सब्सिडी में भी बढ़ोतरी

रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल और मई 2026 के दौरान सरकार ने प्रमुख सब्सिडी मदों पर 755.4 अरब रुपये खर्च किए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 512.5 अरब रुपये था।

  • फूड सब्सिडी 279.9 अरब रुपये से बढ़कर 408 अरब रुपये पहुंच गई।
  • यूरिया सब्सिडी में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
  • न्यूट्रिएंट बेस्ड फर्टिलाइजर सब्सिडी भी पिछले वर्ष की तुलना में करीब 39 प्रतिशत बढ़ी।
  • पेट्रोलियम सब्सिडी पर भी खर्च दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग शून्य था।

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सरकार की वित्तीय रणनीति पर असर

बढ़ते सब्सिडी बिल को देखते हुए माना जा रहा है कि सरकार चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को नियंत्रित रख सकती है। सरकार की प्राथमिकता राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को तय सीमा में बनाए रखने और अतिरिक्त कर्ज से बचने की हो सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 तक सरकार का पूंजीगत खर्च बढ़ा जरूर है, लेकिन आने वाले महीनों में सब्सिडी के बढ़ते बोझ को देखते हुए खर्च की रफ्तार सीमित रह सकती है।

क्या है चुनौती?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा और कच्चे माल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार के लिए सब्सिडी और विकास कार्यों के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होगा। ऐसे में आने वाले महीनों में सरकार को राजकोषीय अनुशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलित रणनीति अपनानी पड़ सकती है।

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