National News: “याचिका खारिज नहीं हुई…” कपिल सिब्बल का बड़ा दावा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नई बहस
मतगणना को लेकर TMC की दलील पर कोर्ट की सहमति का दावा, चुनाव आयोग को सर्कुलर लागू करने के निर्देश
National News: पश्चिम बंगाल चुनाव की मतगणना से पहले कानूनी और राजनीतिक बहस तेज हो गई है। Kapil Sibal ने स्पष्ट किया है कि Supreme Court of India ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिका को केवल खारिज नहीं किया, बल्कि उनकी दलील के एक अहम हिस्से से सहमति भी जताई है।
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कपिल सिब्बल ने कहा कि मीडिया में यह कहना कि याचिका पूरी तरह खारिज कर दी गई है, तथ्यात्मक रूप से गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोर्ट ने चुनाव आयोग के सर्कुलर को लागू करने की बात को सही ठहराया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों की तैनाती से जुड़ा है। All India Trinamool Congress ने इस मुद्दे को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
सिब्बल के अनुसार, चुनाव आयोग के 13 अप्रैल के सर्कुलर में पहले से ही यह प्रावधान था कि मतगणना के दौरान केंद्र और राज्य, दोनों के कर्मचारियों को संयुक्त रूप से तैनात किया जाएगा।
“हमने सर्कुलर को चुनौती नहीं दी”
कपिल सिब्बल ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट में TMC ने सर्कुलर को चुनौती नहीं दी थी, बल्कि उसकी सही तरीके से लागू करने की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि उनकी दलील थी—अगर केंद्र सरकार के कर्मचारी तैनात किए जा रहे हैं, तो राज्य सरकार के कर्मचारियों की भी समान भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। कोर्ट ने इसी बात पर सहमति जताते हुए चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह अपने सर्कुलर को “पूरी तरह और सही भावना के साथ” लागू करे।
सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है?
Supreme Court of India की विशेष पीठ ने इस मामले में कहा कि चुनाव आयोग द्वारा जारी सर्कुलर में कोई खामी नहीं है और मतगणना कर्मियों के चयन का अधिकार आयोग के पास है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस याचिका पर आगे किसी अतिरिक्त आदेश की जरूरत नहीं है। साथ ही, चुनाव आयोग ने अदालत को आश्वस्त किया कि मतगणना के दौरान राज्य और केंद्र दोनों के कर्मचारी मौजूद रहेंगे।
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बीजेपी पर भी साधा निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिब्बल ने Bharatiya Janata Party (BJP) पर भी निशाना साधा। उन्होंने पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों (CAPF) की तैनाती पर सवाल उठाए।
साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि वह अदालत से यह भी आग्रह कर सकते हैं कि मतदान केंद्रों की CCTV फुटेज को 45 दिनों के बाद भी सुरक्षित रखा जाए, ताकि किसी भी विवाद की स्थिति में उसे जांच के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
क्यों अहम है यह बयान?
कपिल सिब्बल का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे सुप्रीम कोर्ट के फैसले की व्याख्या को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
एक तरफ जहां कुछ रिपोर्ट्स में इसे TMC की याचिका खारिज होने के तौर पर पेश किया गया, वहीं सिब्बल का कहना है कि कोर्ट ने उनकी मूल मांग—सर्कुलर के सही क्रियान्वयन—को स्वीकार किया है।
चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी
4 मई को होने वाली मतगणना से पहले इस तरह की कानूनी और राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को और गर्म कर दिया है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि चुनाव आयोग सर्कुलर को किस तरह लागू करता है और मतगणना के दिन यह व्यवस्था जमीन पर कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित कर पाती है।
Written By: Anushri Yadav



