सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी दिल्ली में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर सूची से हटने की शिकायतें मिली थीं। उनके अनुसार, कई लोगों ने उस समय भी यह आरोप लगाया था कि बिना जानकारी दिए उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। AAP नेता का कहना है कि यह प्रक्रिया लगातार जारी रही है और अब SIR को लेकर उठ रहे सवाल उसी क्रम का हिस्सा हैं।
वोटर लिस्ट को लेकर जताई चिंता
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि चुनाव के दिन कई मतदाताओं को मतदान केंद्र पहुंचने पर पता चलता है कि उनका नाम वोटर सूची में मौजूद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे लोग पहले कई चुनावों में मतदान कर चुके होते हैं, लेकिन अचानक उनका नाम सूची से गायब हो जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब पूरी प्रक्रिया तकनीकी और केंद्रीकृत तरीके से संचालित की जा रही है, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
चुनाव आयोग पर साधा निशाना
AAP नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया को लेकर कई तरह की आपत्तियां सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर भी इस विषय पर मतभेद की बातें सामने आई हैं। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। आयोग पहले भी चुनावी प्रक्रियाओं को नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित करने की बात कहता रहा है।
SIR प्रक्रिया की समीक्षा की मांग
सौरभ भारद्वाज ने मांग की कि SIR प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए और जिन मतदाताओं के नाम हटने की शिकायतें सामने आई हैं, उनकी जांच की जाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर पात्र नागरिक का वोट बेहद महत्वपूर्ण है और किसी भी तरह की गड़बड़ी मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।
ED और CBI की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
इस दौरान सौरभ भारद्वाज ने केंद्रीय जांच एजेंसियों ED और CBI की कार्रवाई को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी राज्यों में इन एजेंसियों की गतिविधियां अधिक दिखाई देती हैं। उनके मुताबिक, इससे राजनीतिक माहौल प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां पहले भी ऐसे आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज करती रही हैं।
फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है और इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।