पहले नामांकन वापसी की बात, अब बदले संकेत
रबीउल आलम चौधरी ने कुछ समय पहले उपचुनाव नहीं लड़ने की बात कही थी। उन्होंने दावा किया था कि चुनावी परिस्थितियां उनके पक्ष में नहीं हैं और कार्यकर्ताओं को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद उनके नामांकन वापस लेने की खबर सामने आई थी।
हालांकि अब सूत्रों के हवाले से जानकारी मिल रही है कि वह अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर रहे हैं। इससे रेजीनगर सीट का मुकाबला एक बार फिर दिलचस्प हो गया है।
नए चुनाव चिन्ह को लेकर जताई थी चिंता
रिपोर्टों के अनुसार, रबीउल ने पहले कहा था कि नए चुनाव चिन्ह को कम समय में मतदाताओं तक पहुंचाना आसान नहीं है। उनका मानना था कि इससे चुनाव प्रचार प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा उन्होंने स्थानीय स्तर पर दबाव और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी जैसे आरोप भी लगाए थे।
नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी चर्चा तेज
रेजीनगर का यह घटनाक्रम नंदीग्राम सीट पर हुए घटनाक्रम के बाद सामने आया है। नंदीग्राम में भी एक उम्मीदवार द्वारा नामांकन वापस लेने के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए थे। इसी वजह से रेजीनगर की स्थिति पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।
कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी पर भी मचा था विवाद
नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर भी राजनीतिक बहस छिड़ी हुई है। कांग्रेस ने कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासनिक पक्ष का कहना है कि कार्रवाई पुराने मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है।
आधिकारिक स्थिति पर सबकी नजर
फिलहाल रेजीनगर उपचुनाव में उम्मीदवार की अंतिम स्थिति को लेकर आधिकारिक स्पष्टता का इंतजार किया जा रहा है। यदि रबीउल आलम चौधरी अपने फैसले में बदलाव करते हैं तो उपचुनाव का राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बदल सकता है। वहीं विभिन्न दल इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।