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KGMU विवाद : महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव की भूमिका पर उठे सवाल, प्रशासन से टकराव के बाद बढ़ा बवाल

KGMU विवाद. उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में उनका बिना पूर्व सूचना अचानक पहुंचना, विश्वविद्यालय प्रशासन से तीखा टकराव और समर्थकों के हंगामे ने पूरे मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

यह विवाद दिसंबर 2025 में सामने आए एक महिला डॉक्टर से जुड़े कथित उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण और लव जिहाद के आरोपों से जुड़ा है। 9 जनवरी को अपर्णा यादव अपने समर्थकों के साथ KGMU परिसर पहुंचीं और आरोप लगाया कि मामले की जांच कर रही विशाखा कमेटी निष्पक्ष नहीं है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि पीड़िता पर बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। इस दौरान अपर्णा यादव ने विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद पर सहयोग न करने के आरोप लगाए।

केजीएमयू प्रशासन ने आरोपोंं को किया खारिज

वहीं KGMU प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अपर्णा यादव के दौरे की कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी। प्रशासन के अनुसार, 25 से 30 समर्थकों के साथ कुलपति कार्यालय में प्रवेश की कोशिश से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई और संस्थान की गरिमा को ठेस पहुंची। इस टकराव के बाद मामला और गंभीर हो गया।

विवाद बढ़ने पर विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और शिक्षकों ने पीस मार्च निकालने और कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी। साथ ही महिला आयोग की संवैधानिक भूमिका और अधिकारों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी छिपा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अपर्णा यादव ने इस प्रकरण को महिला अधिकारों से जोड़कर एक बड़े नैरेटिव के रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे उनकी छवि एक मुखर और आक्रामक नेता के रूप में उभर रही है। अपर्णा यादव ने 2014 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा था और 2022 में समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा जॉइन की थी।

हालांकि भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें कोई बड़ा चुनावी अवसर नहीं मिला। सितंबर 2024 में उन्हें राज्य महिला आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।

विश्लेषकों का मानना है कि KGMU विवाद के जरिए अपर्णा यादव भाजपा के कोर एजेंडे से जुड़े मुद्दों पर अपनी सक्रियता और प्रासंगिकता दिखाने की कोशिश कर रही हैं। आलोचक इसे अवसरवाद मानते हैं, जबकि समर्थक उन्हें साहसी और स्वतंत्र विचारों वाली नेता बताते हैं।

एफआईआर नहीं तो ओपीडी सेवाएं बंद करने की चेतावनी

KGMU विवाद ने अब और गंभीर रूप ले लिया है। संयुक्त समिति ने आरोप लगाया है कि महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के साथ आए लोगों ने कुलपति और अन्य अधिकारियों के साथ अभद्रता की, जिससे सरकार की छवि धूमिल हुई।

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समिति का कहना है कि 72 घंटे बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। चेतावनी दी गई है कि यदि अगले 24 घंटे में एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर ओपीडी सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।

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