Crime News: प्रयागराज में अतीक अहमद की सल्तनत का अंत: 100 करोड़ की जमीन मुक्त, प्रशासन का सख्त संदेश
नासिरपुर सिलना में अवैध कब्जा हटाया गया, ईडी और जीएसटी कार्यालय सहित सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटित; भूमाफिया सूची में छह सहयोगी शामिल
Crime News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कभी जिस नाम का खौफ गलियों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक महसूस किया जाता था, आज वही नाम इतिहास बनता जा रहा है। कुख्यात माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की मौत को दो वर्ष से अधिक समय हो चुका है, लेकिन उनके साम्राज्य की परतें अब भी खुल रही हैं। ताज़ा घटनाक्रम में जिला प्रशासन ने अतीक गैंग से जुड़ी लगभग 38 बीघा जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर सरकारी नियंत्रण में ले लिया है। इस जमीन की अनुमानित बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
नासिरपुर सिलना में कार्रवाई
यह भूमि प्रयागराज के नासिरपुर सिलना गांव में स्थित है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, यह जमीन लंबे समय से अतीक गैंग के प्रभाव में थी और उस पर अवैध तरीके से कब्जा किया गया था। एंटी-लैंड माफिया टास्क फोर्स और राजस्व विभाग की संयुक्त कार्रवाई में कब्जा हटाकर जमीन को ग्राम सभा के अधिकार में वापस किया गया। अधिकारियों का कहना है कि अब इस भूमि का उपयोग जनहित और सरकारी परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।
योजना के अनुसार, जमीन के एक हिस्से पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का क्षेत्रीय कार्यालय, जीएसटी विभाग का दफ्तर और छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाए जाने का प्रस्ताव है। प्रशासन का तर्क है कि जिस भूमि का इस्तेमाल कभी भय और दबाव की राजनीति के लिए किया जाता था, अब वही जमीन सार्वजनिक विकास के काम आएगी।
छह सहयोगी भूमाफिया सूची में
सिर्फ जमीन मुक्त कराना ही इस कार्रवाई का उद्देश्य नहीं है। एंटी-लैंड माफिया टास्क फोर्स ने अतीक अहमद के गैंग से जुड़े छह व्यक्तियों को भूमाफिया सूची में शामिल किया है। इन पर हत्या, रंगदारी, अवैध कब्जा और गैंगस्टर एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। जिला अधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया है कि इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया तेज की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि माफिया तंत्र को जड़ से खत्म करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में प्रयागराज और आसपास के जिलों में अवैध संपत्तियों की जब्ती और ध्वस्तीकरण की कई कार्रवाइयाँ की गई हैं।
UP-CRIME: यूपी एटीएस ने जौनपुर जिला जज और पुलिस लाइन गेट को उड़ाने वाले को गिरफ्तार किया
पृष्ठभूमि: उमेश पाल हत्याकांड
अतीक अहमद के नेटवर्क के खिलाफ सख्ती का बड़ा कारण 2023 का बहुचर्चित उमेश पाल हत्याकांड रहा। 24 फरवरी 2023 को दिनदहाड़े उमेश पाल और उनके दो सरकारी सुरक्षाकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना उस समय पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर उभरी थी।
घटना के बाद पुलिस और विशेष कार्यबल ने कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। कुछ आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए, जबकि कुछ गिरफ्तार किए गए। इस बीच 15 अप्रैल 2023 को पुलिस हिरासत में ही अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसने पूरे देश को चौंका दिया। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी कई बहसें जन्म दीं।
राजनीतिक और सामाजिक असर
अतीक अहमद कभी राजनीति में भी सक्रिय रहा था और उसने सांसद तथा विधायक के रूप में भी काम किया था। लेकिन समय के साथ उसका नाम आपराधिक मामलों में गहराता गया। राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में माफिया विरोधी अभियान चलाते हुए अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई को प्रमुख रणनीति बनाया है। प्रशासन का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न रहा हो।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयों में पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि दीर्घकालिक समाधान के लिए केवल संपत्ति जब्ती ही नहीं, बल्कि गवाह सुरक्षा, तेज न्यायिक प्रक्रिया और संस्थागत सुधार भी आवश्यक हैं।
आगे की राह
वर्तमान में अतीक गैंग से जुड़े कुछ नाम अब भी फरार बताए जाते हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि अवैध कब्जों की पहचान कर आगे भी ऐसी कार्रवाइयाँ जारी रहेंगी। नासिरपुर सिलना की 38 बीघा जमीन की मुक्ति को इसी व्यापक अभियान की कड़ी माना जा रहा है।
प्रयागराज की यह कार्रवाई प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है। जिस शहर में कभी अपराध और राजनीति का गठजोड़ चर्चा का विषय था, वहीं अब सरकारी दफ्तर और छात्रावास बनाने की योजना प्रशासन के बदले रुख को दर्शाती है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या यह अभियान माफिया नेटवर्क को स्थायी रूप से खत्म कर पाता है या नहीं, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि अतीक अहमद की कभी मजबूत रही सल्तनत अब बिखर चुकी है और उसके अवशेषों पर कानून का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।
Written By; Anushri Yadav



