Bengal Politics : TMC में बगावत के बीच घिरे यूसुफ पठान, NDA से संपर्क की अटकलों ने बढ़ाई सियासी हलचल
Bengal Politics : तृणमूल कांग्रेस के सांसद यूसुफ पठान का नाम TMC में चल रही बगावत के बीच चर्चा में है। पार्टी नेताओं ने उन पर NDA के संपर्क में होने के आरोप लगाए हैं, जबकि पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भी उनसे जुड़ी चर्चाओं पर सफाई दी है।
Bengal Politics : पूर्व भारतीय क्रिकेटर और बहरामपुर से तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद यूसुफ पठान इन दिनों पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। पार्टी के भीतर जारी अंदरूनी संघर्ष के बीच कुछ नेताओं ने उन पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के संपर्क में होने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, पठान ने अब तक इन दावों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
TMC में विवाद तब और बढ़ गया जब पार्टी की लोकसभा इकाई में कथित तौर पर दो गुट बन गए। बारासात सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी खेमे ने दावा किया कि उनके साथ लगभग 20 सांसद हैं, जो NDA का समर्थन करने के पक्ष में हैं।
कृष्णानगर से TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने सबसे पहले यूसुफ पठान पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए पूछा कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बुलावे पर वह दिल्ली जा रहे हैं। महुआ ने पठान से खुलकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की भी अपील की।
इसके बाद TMC के लोकसभा मुख्य सचेतक (Chief Whip) कल्याण बनर्जी ने भी दावा किया कि उनकी यूसुफ पठान से बातचीत हुई थी। बनर्जी के मुताबिक, पठान ने उन्हें बताया कि अमित शाह ने उन्हें दिल्ली बुलाया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
गौरतलब है कि यूसुफ पठान को 2024 लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बहरामपुर सीट से उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पांच बार के सांसद अधीर रंजन चौधरी को करीब 85 हजार वोटों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की थी।
इस पूरे विवाद के बीच एक और मामला चर्चा में आया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ममता बनर्जी लोकसभा में आने के लिए बहरामपुर सीट खाली करवाना चाहती थीं और इसके लिए पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली को यूसुफ पठान से बात करने की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, सौरव गांगुली ने इन रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
गांगुली ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि ममता बनर्जी ने उनसे कभी भी यूसुफ पठान तक कोई संदेश पहुंचाने को नहीं कहा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने पठान से इस तरह के किसी मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं की।
उधर, TMC में जारी बगावत ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। बागी सांसदों का दावा है कि उनके पास पर्याप्त समर्थन है, जबकि ममता बनर्जी के करीबी नेताओं का कहना है कि संख्या उतनी नहीं है जितनी बताई जा रही है। दल-बदल विरोधी कानून के तहत अलग गुट को मान्यता मिलने के लिए दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी है।
फिलहाल यूसुफ पठान की चुप्पी और TMC के भीतर बढ़ती खींचतान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में उनकी राजनीतिक भूमिका और रुख पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।



