Political News: पश्चिम बंगाल SIR: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, झारखंड और ओडिशा के जज भी करेंगे 80 लाख मामलों का निपटारा
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड और ओडिशा के जजों को भी SIR प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश दिया, ताकि 80 लाख दावों का निपटारा समय पर किया जा सके।
Political News: पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य में चल रही SIR प्रक्रिया को तेज़ और निष्पक्ष बनाने के लिए यह निर्णय लिया कि झारखंड और ओडिशा के सिविल और जिला जजों को भी तैनात किया जाएगा, ताकि लगभग 80 लाख दावों और आपत्तियों का निपटारा समय पर किया जा सके।
SIR प्रक्रिया और समय की चुनौती
विशेष गहन पुनरीक्षण या SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और सभी योग्य मतदाताओं को शामिल करना है। पश्चिम बंगाल में करीब 80 लाख दावों और आपत्तियों का निपटारा करना बहुत बड़ा काम है। वर्तमान में लगभग 250 जिला न्यायाधीश इस काम में तैनात थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े मामले को केवल इसी संख्या में निपटाना मुश्किल होगा और समय की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है।
अदालत ने निर्देश दिया कि अन्य राज्यों के अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को भी बुलाया जा सकता है ताकि प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। इस कदम से न केवल समय की बचत होगी बल्कि पुनरीक्षण में पारदर्शिता और निष्पक्षता भी सुनिश्चित होगी।
झारखंड और ओडिशा के जज भी करेंगे मदद
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिविल जज और आवश्यक होने पर अन्य अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। अब झारखंड और ओडिशा के जज पश्चिम बंगाल में दावों और आपत्तियों की जांच करेंगे। इससे SIR प्रक्रिया तेजी से पूरी होगी और मतदाता सूची समय पर अपडेट हो सकेगी।
चुनाव आयोग और खर्चों का प्रावधान
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस प्रक्रिया में लगे अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों के खर्चों को Election Commission of India (ECI) वहन करेगा। इससे राज्य या केंद्र सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को अनुमति दी है कि 28 फरवरी 2026 तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाए। साथ ही अदालत ने कहा कि अगर SIR प्रक्रिया के दौरान नए मतदाता योग्य पाए जाते हैं, तो उन्हें पूरक सूचियों में शामिल किया जा सकता है। ऐसे मतदाता भी मूल सूची का हिस्सा ही माने जाएंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच विवाद चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई बाधा न बने और मतदाता सूची का पुनरीक्षण समय पर पूरा होना चाहिए। इस दिशा में अन्य राज्यों के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती एक ऐतिहासिक कदम है।
इस फैसले से न केवल SIR प्रक्रिया तेज़ होगी, बल्कि 80 लाख दावों और आपत्तियों का निपटारा समय पर और निष्पक्ष तरीके से होगा। यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र में मतदाता अधिकारों की रक्षा और चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
Written By: Anushri Yadav



