Global Oil Supply Crisis : होर्मुज से मुंबई तक कैसे पहुंचा तेल टैंकर, जहाज के कैप्टन ने सुनाई दास्तां

Global Oil Supply Crisis : पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच शेनलोंग तेल टैंकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर मुंबई पहुँचा। GPS जैमिंग और डिजिटल ब्लैकआउट के बावजूद क्रू ने मैनुअल नेविगेशन से 1.35 लाख टन कच्चा तेल भारत पहुँचाया।

Global Oil Supply Crisis : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और इलेक्ट्रॉनिक जामिंग के खतरे के बीच लाइबेरिया का झंडा लगा तेल टैंकर Shenlong Suezmax oil tanker सुरक्षित रूप से भारत पहुँच गया। यह जहाज़ बुधवार (11 मार्च) को मुंबई के Jawahar Dweep Terminal पर डॉक हुआ।

यह टैंकर सऊदी अरब से करीब 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आया था और 28 फरवरी को शुरू हुए क्षेत्रीय संघर्ष के बाद Strait of Hormuz से होकर भारत पहुँचने वाला पहला जहाज़ माना जा रहा है।

डिजिटल ब्लैकआउट में पूरी हुई यात्रा

टैंकर की यात्रा सऊदी अरब के Ras Tanura Terminal से शुरू हुई थी। जैसे ही जहाज़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य के करीब पहुँचा, चालक दल को इलेक्ट्रॉनिक नेविगेशन सिस्टम में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

सूत्रों के मुताबिक जहाज़ का AIS (Automatic Identification System) और ट्रांसपोंडर कई घंटों तक सिग्नल नहीं भेज पाए। इसी दौरान जहाज़ ट्रैकिंग सिस्टम से कुछ समय के लिए गायब भी हो गया था और बाद में फिर दिखाई दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में GPS स्पूफिंग और जैमिंग की घटनाएँ बढ़ गई हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक युद्ध का हिस्सा हैं और आधुनिक सैटेलाइट नेविगेशन को निष्क्रिय कर सकती हैं।

पुराने तरीके से जहाज़ चलाना पड़ा

GPS सिग्नल बार-बार गायब होने के कारण जहाज़ के क्रू को पारंपरिक मैनुअल नेविगेशन पर निर्भर रहना पड़ा। जहाज़ के कैप्टन Sushant Singh Sandhu ने इस यात्रा को “कई अनिश्चितताओं से भरा” बताया।

सेकंड ऑफिसर Abhijeet Alok के अनुसार ब्रिज टीम ने पुराने समुद्री तरीकों से दिशा तय कर जहाज़ को सुरक्षित मार्ग पर रखा।

29 सदस्यीय क्रू में भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस के नाविक शामिल थे। पाकिस्तान के कराची निवासी थर्ड ऑफिसर Usman Arshad ने बताया कि पूरे सफर के दौरान कैप्टन शांत रहे और क्रू को लगातार स्थिति से अवगत कराते रहे।

वापसी यात्रा भी जोखिम भरी

मुंबई में तेल उतारने के बाद टैंकर को यूएई के Fujairah Port के लिए रवाना होना है। हालांकि यह बंदरगाह होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है, लेकिन हाल के दिनों में यहां भी ड्रोन हमलों की घटनाएँ सामने आई हैं।

भारतीय नाविकों पर खतरा

इस बीच संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ गया है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार हाल के हमलों में विदेशी झंडे वाले जहाज़ों पर सवार तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है और एक अभी भी लापता है।

फिलहाल फारस की खाड़ी क्षेत्र में 28 भारतीय झंडे वाले जहाज़ और 778 भारतीय नाविक मौजूद हैं। सरकार ने 22 जहाज़ों को प्राथमिकता सूची में रखा है और जरूरत पड़ने पर उन्हें भारतीय नौसेना की एस्कॉर्ट सुरक्षा दी जा सकती है।

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