Middle East Tension: ईरान संकट पर शशि थरूर नाराज, पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठाए सवाल
Middle East Tension: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने भारत की कूटनीतिक भूमिका को लेकर निराशा जाहिर की है। अब तक केंद्र सरकार के रुख का समर्थन करते रहे थरूर ने पहली बार खुलकर अपनी असहमति सामने रखी है। दरअसल, ईरान से जुड़े इस संकट में पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता की खबरों ने उन्हें असहज कर दिया है। उनका मानना है कि इस स्थिति में भारत को शांति प्रयासों का नेतृत्व करना चाहिए था।
‘शांति प्रक्रिया में भारत को आगे आना चाहिए’
तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने कहा कि उन्होंने Narendra Modi सरकार की “संयम और चुप्पी” की नीति का समर्थन इस उम्मीद में किया था कि भारत खुद को एक शांति स्थापित करने वाले देश के रूप में पेश करेगा। लेकिन मौजूदा हालात में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश मध्यस्थता की भूमिका में नजर आ रहे हैं। थरूर ने इसे “निराशाजनक” और “शर्मिंदगी भरा” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपने मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंधों का उपयोग करते हुए सक्रिय पहल करनी चाहिए।
पाकिस्तान की भूमिका पर सरकार का जवाब
इस मुद्दे पर विदेश मंत्री S. Jaishankar ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए साफ कहा कि भारत “दलाल देश” नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान पहले भी ऐसी भूमिकाओं में दिखाई देता रहा है और यह कोई नई बात नहीं है। सरकार के अनुसार, भारत अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति पर कायम है।
भारत के लिए सकारात्मक संकेत भी
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। ईरान ने जिन देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की घोषणा की है, उनमें भारत भी शामिल है। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इससे ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित असर कम हो सकता है।
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ईरान संकट ने एक बार फिर भारत की विदेश नीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ विपक्ष सरकार की रणनीति पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार संतुलित कूटनीति का दावा कर रही है। अब देखने वाली बात होगी कि आने वाले दिनों में भारत इस क्षेत्रीय संकट में कितनी सक्रिय भूमिका निभाता है।



