सुल्तानपुर। सुल्तानपुर का इकलौता ट्रॉमा सेंटर बदहाल, 24 घंटे सेवा के अभाव में सड़क हाद सो में पीड़ितों की बढ़ी परेशानी

चिकित्सकों के अभाव में दम तोड़ रहा ट्रामा सेंटर

सुल्तानपुर। सुल्तानपुर और वाराणसी को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित जनपद का इकलौता ट्रॉमा सेंटर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। मेडिकल कॉलेज के अधीन होने के बावजूद यहां आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल स्थिति में हैं, जिससे आए दिन सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है।

जानकारी के अनुसार ट्रॉमा सेंटर में तैनात चिकित्सक अपनी जिम्मेदारियों के बजाय निजी क्लीनिकों में अधिक व्यस्त रहते हैं। यहां पर डॉक्टर समीर सुमन, डॉक्टर आर. ए. वर्मा, डॉक्टर गुफरान सहित दो जूनियर रेजिडेंट की तैनाती है, जबकि मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों की भरमार है यहां पर सर्जन और फिजिशियन की भी नियुक्ति होनी चाहिए लेकिन ट्रॉमा सेंटर की सेवाएं केवल सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक ही सीमित हैं। जबकि नियमों के अनुसार ट्रॉमा सेंटर में 24 घंटे चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि डॉक्टर समीर सुमन बस स्टेशन क्षेत्र में अपनी निजी क्लीनिक चलाते हैं, वहीं डॉक्टर आर. ए. वर्मा भी शहर के बढ़ैयावीर इलाके में निजी प्रैक्टिस में व्यस्त रहते हैं।

ऐसे में ट्रॉमा सेंटर की जिम्मेदारी मुख्य रूप से जूनियर रेजिडेंट्स के भरोसे ही चल रही है। इमरजेंसी में डॉक्टर गुफरान से सेवा ली जा रही हैं, सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि ट्रॉमा सेंटर में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। यहां तक कि एक्स-रे जैसी आवश्यक जांच की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। गंभीर रूप से घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद लखनऊ या शहर में स्थिति मेडिकल कॉलेज के आकस्मिक कक्ष में रेफर कर दिया जाता है वहां से मरीज ट्रामा सेंटर या पीजीआई रेफर होता है, जिससे कई बार रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देते हैं।

Also Read: बांग्लादेश पाकिस्तान संबंध: तारिक रहमान का पाकिस्तान पर बड़ा हमला, 1971 नरसंहार को लेकर सख्त संदेश

हाईवे पर लगातार हो रहे सड़क हादसों के मद्देनजर यह ट्रॉमा सेंटर क्षेत्र के लिए जीवन रेखा साबित हो सकता है, लेकिन वर्तमान में यह केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहा है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि ट्रॉमा सेंटर को तत्काल प्रभाव से 24 घंटे संचालित किया जाए, पर्याप्त चिकित्सक व संसाधन उपलब्ध कराए जाएं और निजी प्रैक्टिस में लिप्त चिकित्सकों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

यदि समय रहते प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में हादसा पीड़ितों की मौत का आंकड़ा और बढ़ सकता है। जनहित में इस ट्रॉमा सेंटर को सुचारू रूप से 24 घंटे संचालित करना अत्यंत आवश्यक है।

Related Articles

Back to top button