Barabanki News: बाराबंकी में भीषण आग से 150 बीघा गेहूं फसल राख, किसानों की सालभर की मेहनत खत्म
हाईटेंशन लाइन से निकली चिंगारी बनी तबाही की वजह, तीन गांवों के 50 से ज्यादा किसान प्रभावित
Barabanki News: उत्तर प्रदेश के Barabanki जिले में घटी एक दर्दनाक घटना ने किसानों की मेहनत और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोनी कटरा थाना क्षेत्र के सादुल्लापुर गांव में शनिवार दोपहर एक मामूली सी दिखने वाली घटना ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया और तीन गांवों के किसानों की पूरी मेहनत को राख में बदल दिया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, खेतों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन पर एक पक्षी बैठा हुआ था। अचानक वह करंट की चपेट में आ गया, जिससे तेज धमाका हुआ और चिंगारी नीचे खेतों में गिर गई। उस समय खेतों में गेहूं की फसल कटाई के करीब थी और कई जगह सूखी अवस्था में खड़ी थी। सूखी फसल में आग तेजी से फैलने की संभावना अधिक होती है, और यही यहां हुआ।
देखते ही देखते आग ने सादुल्लापुर से फैलकर बीरमपुर और त्रिलोकपुर गांवों के खेतों को भी अपनी चपेट में ले लिया। तेज हवाओं ने आग को और भड़काया, जिससे स्थिति कुछ ही समय में नियंत्रण से बाहर हो गई। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। खेतों में कई फीट ऊंची लपटें उठने लगीं और आसमान में काला धुआं छा गया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
इस हादसे में करीब 50 से अधिक किसानों की लगभग 150 बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई। यह नुकसान केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि उन किसानों के लिए एक गहरा मानसिक आघात भी है, जिनकी सालभर की मेहनत इसी फसल पर टिकी होती है। प्रभावित किसानों में कई छोटे और सीमांत किसान भी शामिल हैं, जिनके लिए यह नुकसान सीधे उनकी आजीविका पर असर डालता है।
घटना के बाद ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी, लेकिन लोगों का आरोप है कि राहत दल समय पर नहीं पहुंचा। कई बार कॉल करने के बावजूद दमकल की गाड़ियां देर से मौके पर पहुंचीं। ऐसे में गांव के लोगों ने खुद ही बाल्टियों, पाइप और उपलब्ध संसाधनों की मदद से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। घंटों की कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक ज्यादातर फसल जल चुकी थी।
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ग्रामीणों का यह भी कहना है कि अगर दमकल समय पर पहुंच जाती, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। इस देरी को लेकर गांव में नाराजगी का माहौल है और लोग प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
यह घटना बिजली लाइनों के रखरखाव और सुरक्षा उपायों की कमी को भी उजागर करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर हाईटेंशन लाइनें खेतों के ऊपर से गुजरती हैं, और ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय-समय पर इन लाइनों की जांच, सही इंसुलेशन और आसपास की सूखी घास या फसल की सफाई जैसी सावधानियां इस तरह की घटनाओं को रोक सकती हैं।
फिलहाल प्रभावित किसान प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द सर्वे कराकर उचित आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए, ताकि वे अपनी आजीविका को दोबारा खड़ा कर सकें।
यह घटना एक बड़ी चेतावनी भी है—कि प्राकृतिक या तकनीकी कारणों से होने वाली छोटी सी चूक भी किसानों के लिए कितनी बड़ी त्रासदी बन सकती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और पीड़ित किसानों को राहत कब तक मिल पाती है।
Written By: Anushri Yadav



