Madhya Pradesh news: केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र आंदोलन, ‘न्याय दो या मार दो’ के साथ तेज हुआ विरोध
मुआवज़े और पारदर्शिता की मांग को लेकर 10 दिनों से जारी प्रदर्शन, जल सत्याग्रह से लेकर सांकेतिक फांसी तक अपनाए अनोखे तरीके
Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिलों में चल रही केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध एक बार फिर तेज हो गया है। मुआवज़े में कथित गड़बड़ी, दस्तावेज़ों की कमी और पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता न होने के आरोपों के बीच पिछले 10 दिनों से आंदोलन लगातार जारी है।
यह आंदोलन 5 अप्रैल से शुरू हुआ था, जो अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें न तो उचित मुआवज़ा दिया गया है और न ही परियोजना से जुड़े जरूरी दस्तावेज़ उपलब्ध कराए गए हैं। इसी के विरोध में ग्रामीणों ने जल सत्याग्रह, भूख हड़ताल, मिट्टी में धंसकर प्रदर्शन और यहां तक कि सांकेतिक फांसी जैसे कठोर तरीके अपनाए हैं।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि यह सिर्फ अधिकारों की नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई है। उनके मुताबिक, “अगर सरकार को हमारा बलिदान चाहिए, तो हम उसके लिए भी तैयार हैं, लेकिन बिना न्याय के पीछे नहीं हटेंगे।”
कैसे शुरू हुआ आंदोलन?

पन्ना और छतरपुर के ग्रामीण ‘जय किसान संगठन’ के बैनर तले एकजुट हुए हैं। संगठन का गठन परियोजना से प्रभावित लोगों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से किया गया था। मार्च में प्रशासन के साथ हुई बातचीत में ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया था कि ग्रामसभा की सहमति से जुड़े दस्तावेज़ जल्द दिखाए जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसके बाद ग्रामीणों ने दिल्ली जाकर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया, लेकिन उन्हें रोका गया। इसके बाद उन्होंने दौधन बांध के पास धरना शुरू कर दिया, जो अब बड़े आंदोलन में बदल चुका है।
क्या हैं ग्रामीणों के आरोप?

ग्रामीणों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में उनकी सहमति नहीं ली गई और न ही उन्हें सही जानकारी दी गई। उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा दिखाई गई ग्रामसभा की सहमति वास्तव में हुई ही नहीं है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि मुआवज़े की प्रक्रिया पारदर्शी हो और दोबारा सर्वे किया जाए। इसके साथ ही सभी प्रभावित परिवारों को कम से कम 25 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाए, क्योंकि वर्तमान में दिए जा रहे 12.5 लाख रुपये अपर्याप्त हैं।
परियोजना से कितना नुकसान?

केन-बेतवा लिंक परियोजना के पहले चरण में बनने वाले दौधन बांध के कारण लगभग 9000 हेक्टेयर भूमि डूब क्षेत्र में आ जाएगी। इसमें 5258 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है और करीब 10 गांव पूरी तरह प्रभावित होंगे।
इसके अलावा मझगांव और रुंज परियोजनाओं के तहत भी हजारों हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जा रही है, जिससे हजारों परिवारों के विस्थापन का खतरा है।
प्रशासन का क्या कहना है?

छतरपुर और पन्ना जिला प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों को मुआवज़ा नहीं मिला है, उनका सर्वे किया जा रहा है और विसंगतियों को दूर करने के लिए विशेष टीम गठित की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, 14 गांवों में आवेदन की जांच कर 7 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन पहले भी कई बार आश्वासन देकर पीछे हट चुका है। उनका कहना है कि अब उन्हें केवल जमीनी स्तर पर समाधान चाहिए।
आंदोलन का अगला कदम
ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। 16 अप्रैल को आंदोलन की आगे की रणनीति तय करने के लिए एक अहम बैठक बुलाई गई है।
Written By: Anushri Yadav



