Technology/National News: AI बन सकता है ‘भस्मासुर’? रक्षा मंत्री Rajnath Singh की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता
डीपफेक, साइबर युद्ध और ऑटोनॉमस हथियारों के खतरे गिनाते हुए बोले—तकनीक का गलत इस्तेमाल देश के लिए बन सकता है बड़ा संकट
Technology/National News: नई दिल्ली में आयोजित एक अहम सुरक्षा सम्मेलन में रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ी और स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने AI की तुलना पौराणिक पात्र ‘भस्मासुर’ से करते हुए कहा कि अगर यह ताकतवर तकनीक गलत हाथों में चली जाए, तो इसके परिणाम बेहद विनाशकारी हो सकते हैं।
रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया तेजी से AI आधारित तकनीकों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने साफ कहा कि AI केवल अवसर नहीं, बल्कि एक बड़ी चुनौती भी है। खासकर डीपफेक तकनीक, साइबर हमले और ऑटोनॉमस हथियारों ने आधुनिक युद्ध की तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है।
क्यों दी ‘भस्मासुर’ वाली चेतावनी?
रajnath Singh ने समझाया कि जैसे पौराणिक कथा में भगवान शिव द्वारा दिया गया वरदान भस्मासुर के लिए ही खतरा बन गया था, वैसे ही AI भी दोधारी तलवार है। एक ओर यह बैंकिंग, हेल्थकेयर और पावर सेक्टर को मजबूत बना सकता है, वहीं दूसरी ओर इसका गलत इस्तेमाल इन सिस्टम्स को पूरी तरह ध्वस्त भी कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में तकनीक का दुरुपयोग पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। ऐसे में केवल AI के सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके खतरों को समझना और उनसे निपटने की रणनीति बनाना भी उतना ही जरूरी है।
रक्षा क्षेत्र में AI की बढ़ती भूमिका
रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि भारतीय सशस्त्र बल AI का इस्तेमाल कर अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने BrahMos missile की सटीकता बढ़ाने में AI की भूमिका का जिक्र किया, साथ ही आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और सर्विलांस प्लेटफॉर्म में इसके उपयोग को भी महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के जरिए सेना की मारक क्षमता और निर्णय लेने की गति दोनों में सुधार हो रहा है, जिससे भारत की रक्षा प्रणाली और अधिक प्रभावी बन रही है।
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‘सुरक्षा के साथ विकास’ का संतुलन जरूरी
हालांकि, अपने बयान में Rajnath Singh ने AI के सकारात्मक उपयोगों को भी नजरअंदाज नहीं किया। उन्होंने बताया कि सरकार AI का उपयोग सिर्फ रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि इसे आम नागरिकों और पूर्व सैनिकों के जीवन को बेहतर बनाने में भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
उदाहरण के तौर पर, पेंशन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए AI आधारित सिस्टम विकसित किया गया है, जिससे रिटायर्ड सैनिकों को काफी सुविधा मिल रही है।
आगे की चुनौती क्या है?
रक्षा मंत्री का साफ संदेश है कि आने वाला समय AI का है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी और सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। अगर इस तकनीक को सही दिशा में इस्तेमाल किया जाए, तो यह देश को सुरक्षित और मजबूत बना सकती है, लेकिन गलत हाथों में जाने पर यही ‘भस्मासुर’ बनकर खतरा भी पैदा कर सकती है।
Written By: Anushri Yadav



