Tamil Nadu में विजय सरकार की अग्निपरीक्षा, विधानसभा में फ्लोर टेस्ट पर टिकी निगाहें
Tamil Nadu के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के लिए सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही राजनीतिक चुनौतियां सामने आ गई हैं। तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार को अब विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का सामना करना है, जो यह तय करेगा कि विजय अपनी सरकार को स्थिरता के साथ आगे बढ़ा पाएंगे या नहीं।
फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय का यह सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकी। 234 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी को 108 सीटें मिलीं, जबकि बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत थी। यही वजह रही कि तमिलनाडु में 1967 के बाद पहली बार त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनी।
शुरुआत में कांग्रेस के पांच विधायकों ने TVK को समर्थन दिया, लेकिन यह संख्या सरकार बनाने के लिए पर्याप्त नहीं थी। इसके बाद विजय ने कई दौर की राजनीतिक बातचीत की और अंततः CPI, CPI(M), VCK और IUML जैसी पार्टियों का समर्थन हासिल करने में सफल रहे। इन सहयोगी दलों के साथ बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद विजय ने 10 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
हालांकि, फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले सरकार को एक बड़ा झटका भी लगा। मद्रास हाई कोर्ट ने TVK विधायक सीनिवासा सेतुपति को विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने से रोक दिया। उनके चुनाव को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है, जिसके चलते अदालत ने यह अंतरिम आदेश जारी किया। इस फैसले से विधानसभा में TVK की संख्या अस्थायी रूप से कम हो गई है और सरकार की चिंता बढ़ गई है।
इसी बीच विजय को AIADMK के कुछ बागी नेताओं का अप्रत्याशित समर्थन भी मिला है। सीवी शन्मुगम और एसपी वेलुमणि जैसे नेताओं ने खुलकर TVK सरकार के पक्ष में रुख दिखाया है। माना जा रहा है कि AIADMK नेतृत्व और DMK के बीच संभावित नजदीकियों के विरोध में यह समर्थन सामने आया है। इस घटनाक्रम ने AIADMK के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान को भी उजागर कर दिया है।
इसके अलावा AMMK विधायक कामराज ने भी विजय सरकार को समर्थन देने की घोषणा की थी, हालांकि बाद में पार्टी प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।
बुधवार को होने वाला विश्वास मत सिर्फ संख्याओं का खेल नहीं होगा, बल्कि यह विजय के राजनीतिक नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा भी मानी जा रही है। यदि सहयोगी दल एकजुट रहते हैं तो सरकार बहुमत साबित कर सकती है, लेकिन गठबंधन की राजनीति में छोटे दलों की भूमिका हमेशा अहम मानी जाती है।
विपक्ष पहले ही सरकार की वैधता और तिरुपत्तूर सीट से जुड़े कानूनी विवादों को मुद्दा बना रहा है। ऐसे में विधानसभा के भीतर होने वाली बहस और मतदान पर पूरे राज्य की नजर रहेगी।
फ्लोर टेस्ट के बाद भी विजय के सामने चुनौतियां कम नहीं होंगी। उन्हें एक बंटी हुई विधानसभा, आक्रामक विपक्ष और गठबंधन सहयोगियों के बीच संतुलन बनाकर शासन चलाना होगा। हालांकि AIADMK में दिख रही अंदरूनी टूट विजय के लिए भविष्य में राजनीतिक अवसर भी पैदा कर सकती है।
तमिलनाडु की राजनीति इस समय एक नए दौर से गुजर रही है और आने वाले दिन यह तय करेंगे कि विजय सिर्फ लोकप्रिय नेता बनकर रहेंगे या एक सफल मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर पाएंगे।



