How to Make Jeevamrit: पौधों के लिए ऐसे बनाएं जीवामृत, गमले की मिट्टी होगी उपजाऊ और पौधों की ग्रोथ भी बढ़ेगी

गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन से घर पर बनाएं जीवामृत, जानिए सही तरीका और पौधों में इस्तेमाल करने का तरीका

How to Make Jeevamrit: अगर आपके घर की बालकनी, छत या गार्डन में लगे पौधों की ग्रोथ रुक गई है, पत्तियां पीली पड़ रही हैं या गमले की मिट्टी बार-बार सख्त हो जाती है, तो पौधों की देखभाल के लिए जीवामृत का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एक पारंपरिक जैविक घोल है, जिसे घर पर ही गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और थोड़ी सी मिट्टी की मदद से तैयार किया जा सकता है। खास बात यह है कि इसे बनाने में बहुत ज्यादा खर्च नहीं आता और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह मिट्टी की जैविक गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

आजकल बहुत से लोग घर में गार्डनिंग करना पसंद करते हैं। गमलों में तुलसी, मिर्च, टमाटर, धनिया, गुलाब, गेंदा और कई तरह के सजावटी पौधे लगाए जाते हैं। लेकिन लगातार एक ही गमले में पौधा लगे रहने और रासायनिक खादों के अधिक इस्तेमाल से मिट्टी की संरचना खराब हो सकती है। मिट्टी कड़ी हो जाती है और पानी भी ठीक से नीचे नहीं जाता। ऐसे में जैविक तरीके से मिट्टी की देखभाल करना पौधों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

जीवामृत को एक तरह का माइक्रोबियल कल्चर या जैविक घोल माना जाता है। इसमें मौजूद जैविक पदार्थ सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इससे मिट्टी में मौजूद जैविक पदार्थों के टूटने और पोषक तत्वों की उपलब्धता में मदद मिलती है। हालांकि इसे किसी चमत्कारी खाद की तरह नहीं देखना चाहिए। पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए सही मिट्टी, पर्याप्त रोशनी, पानी, जल निकासी और पौधे की जरूरत के मुताबिक पोषण भी जरूरी है।

घर पर जीवामृत बनाने के लिए आपको करीब 10 लीटर पानी, 500 ग्राम गाय का गोबर, 500 मिलीलीटर गोमूत्र, 100 ग्राम गुड़, 100 ग्राम बेसन और पेड़ के नीचे की थोड़ी सी मिट्टी चाहिए। पेड़ के नीचे की मिट्टी में प्राकृतिक रूप से कई तरह के सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं, इसलिए पारंपरिक विधि में इसे मिश्रण में मिलाया जाता है।

इसे बनाने के लिए सबसे पहले 15 से 20 लीटर की साफ प्लास्टिक बाल्टी लें और उसमें 10 लीटर पानी डालें। अब इसमें गाय का गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और थोड़ी सी मिट्टी डालकर अच्छी तरह मिला दें। लकड़ी की छड़ी से मिश्रण को कुछ देर चलाएं। इसके बाद बाल्टी को पूरी तरह एयरटाइट बंद करने के बजाय कपड़े या ढीले ढक्कन से ढककर छायादार जगह पर रख दें। मिश्रण को रोजाना एक बार लकड़ी की छड़ी से हिलाना पारंपरिक विधि का हिस्सा है।

आमतौर पर गर्म मौसम में यह मिश्रण कुछ दिनों में तैयार हो सकता है। इसे करीब 4 से 6 दिनों तक रखने की सलाह दी जाती है, लेकिन तापमान और परिस्थितियों के अनुसार समय बदल सकता है। तैयार होने के बाद इसे लंबे समय तक रखने के बजाय ताजा अवस्था में इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। इसमें तेज या असामान्य सड़ांध जैसी गंध, फफूंद की असामान्य परत या अन्य खराबी दिखाई दे तो इसे पौधों में डालने से बचना चाहिए।

जीवामृत को गमले में डालने से पहले पानी के साथ पतला करना जरूरी है। सीधे गाढ़ा घोल डालने के बजाय इसे लगभग 1:10 के अनुपात में पानी के साथ मिलाया जा सकता है। यानी एक लीटर जीवामृत में करीब 10 लीटर पानी मिलाकर इस्तेमाल करें। छोटे गमलों में इसकी मात्रा भी कम रखें। मिट्टी पहले से बहुत गीली हो तो तुरंत घोल डालने के बजाय मिट्टी के थोड़ा सूखने का इंतजार करना बेहतर है।

इसे पौधों की जड़ों के आसपास मिट्टी में दिया जा सकता है। हर 15 से 20 दिन में एक बार इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है, लेकिन पौधे की प्रजाति, गमले का आकार, मिट्टी और मौसम के अनुसार मात्रा और अंतराल कम-ज्यादा हो सकता है। बहुत ज्यादा जैविक घोल डालना भी पौधों के लिए जरूरी नहीं है।

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जीवामृत का इस्तेमाल कई तरह के पौधों में किया जा सकता है। सब्जियों, फूलों वाले पौधों, फलदार पौधों, सजावटी पौधों और कई सामान्य घरेलू पौधों में इसे मिट्टी के जैविक प्रबंधन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। तुलसी जैसे पौधों में भी इसे सावधानी से दिया जा सकता है। वहीं कैक्टस और अन्य रसीले पौधों में इसका इस्तेमाल बहुत कम मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि इन पौधों को अधिक नमी पसंद नहीं होती।

इस जैविक घोल का सबसे बड़ा फायदा मिट्टी की सेहत को माना जाता है। नियमित और संतुलित उपयोग से मिट्टी में जैविक गतिविधि को बढ़ावा मिल सकता है। मिट्टी की संरचना बेहतर होने पर जड़ों के आसपास हवा और पानी का संतुलन भी अच्छा रह सकता है। इससे पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध होने में मदद मिल सकती है और जड़ों के विकास के लिए बेहतर वातावरण बन सकता है।

हालांकि यह दावा करना सही नहीं होगा कि जीवामृत अकेले पौधों में हर बीमारी या कीट का इलाज कर देता है या इससे सभी पौधे तेजी से बढ़ने लगेंगे। पौधों की ग्रोथ कई चीजों पर निर्भर करती है। इसलिए जीवामृत के साथ पर्याप्त धूप, सही पानी, अच्छी जल निकासी, उचित गमला और पौधे की जरूरत के मुताबिक खाद देना भी जरूरी है।

अगर आप घर में केमिकल खाद का इस्तेमाल कम करना चाहते हैं और गमले की मिट्टी को जैविक तरीके से बेहतर बनाए रखना चाहते हैं, तो जीवामृत एक कम लागत वाला विकल्प हो सकता है। बस इसे सही अनुपात में तैयार करें, पतला करके इस्तेमाल करें और पौधे की जरूरत के मुताबिक ही मात्रा दें। थोड़ी सी सावधानी के साथ घर की गार्डनिंग में यह मिट्टी की देखभाल का एक उपयोगी हिस्सा बन सकता है।

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